विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा के अपर कलेक्टर अनिल कुमार डामोर कलेक्टर को शासन का अंग ना मानते हुए और पारदर्शिता को तिलांजलि देकर फैसले पारित कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश शासन ने कलेक्टरों को जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों का प्रशासक नियुक्त करते हुए बैंकों की कमान उन्हें सौंपी है। इसके बावजूद अपर कलेक्टर यह नहीं मानते कि कलेक्टर शासन का अंग हैं। इसलिए जिला सहकारी बैंक के सीईओ विनय प्रकाश सिंह के कुतर्कों को स्वीकार कर जनहित के विरुद्ध फैसला सुना रहे हैं। हालत यह है कि जो जानकारी कलेक्टरेट में संधारित होनी चाहिए उसके लिए भी कलेक्टर कार्यालय बैंक के पाले में गेंद डालकर अपना पल्ला झाड़ लेता है।
अभी हाल ही में अपील आवेदन पर अपर कलेक्टर ने दुनिया का ऐसा पहला आदेश पारित किया है, जिसमें मांगी गई जानकारी का ही उल्लेख नहीं किया गया, जबकि एमपी धमाका ने कलेक्टर एवं प्रशासक जिला सहकारी बैंक की अध्यक्षता में हुई प्रशासकीय कमेटी की बैठकों की कार्यवाही की जानकारी मांगी थी। इसे दिलाना तो दूर अपर कलेक्टर ने अपने निर्णय में इसका उल्लेख तक नहीं किया। यह समझ से परे है कि बैठकों की उस कार्यवाही को क्यों छिपाया जा रहा है जो कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठकों में लिखी गई। जबकि बैठकें कलेक्ट्रेट में होती हैं और वहां की जानकारी के लिए हर बार बैंक सीईओ को आवेदन अंतरित कर कलेक्टर कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं, इस तरफ अपर कलेक्टर नजर नहीं डालते हैं। कुल मिलाकर सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने की बात केवल कागजों में चल रही है। याद रहे कि अपर कलेक्टर अनिल कुमार डामोर को कुछ दिन पहले ही आईएएस अवार्ड मिला है।
फोटो दैनिक भास्कर साभार