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मकर संक्रांति 2026: कर्म, धर्म, सूर्य चेतना और भाग्य परिवर्तन का दिव्य महासंधि पर्व


मकर संक्रांति भारतीय सनातन परंपरा का वह महापर्व है, जहां खगोलीय परिवर्तन, ज्योतिषीय नियम और आध्यात्मिक चेतना—तीनों एक साथ सक्रिय होते हैं। वर्ष 2026 की मकर संक्रांति साधारण नहीं है; यह पर्व जीवन की दिशा, सोच की धारा और कर्म की गति को बदलने की अद्भुत क्षमता रखता है।

इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, जिसे शास्त्रों में देवताओं का दिन कहा गया है। उत्तरायण का अर्थ केवल सूर्य की दिशा बदलना नहीं, बल्कि मानव चेतना का ऊपर उठना है—तमस से सत्व की ओर, जड़ता से सक्रियता की ओर।

मेरे दशकों के वैदिक ज्योतिष, आध्यात्मिक साधना और हजारों कुंडली विश्लेषणों के अनुभव में, मकर संक्रांति वह समय है जब पुराने कर्मों का लेखा-जोखा सक्रिय होता है और नए कर्मों की नींव रखी जाती है।

मकर संक्रांति 2026: गूढ़ ज्योतिषीय संरचना

वैदिक ज्योतिष के अनुसार:

सूर्य — आत्मा, आत्मबल, नेतृत्व, स्वास्थ्य, सम्मान और पिता का कारक

मकर राशि — शनि की राशि, जो कर्म, अनुशासन, न्याय, तप और स्थायित्व का प्रतीक है


जब सूर्य शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तब: अहंकार अनुशासन में परिवर्तित होता है

इच्छाएँ उत्तरदायित्व से जुड़ती हैं

भाग्य कर्म के अधीन हो जाता है

यह समय विशेष रूप से उन जातकों के लिए अत्यंत निर्णायक होता है:

जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो।

जिनके जीवन में कठोर परिश्रम के बावजूद फल में देरी हो रही हो।

जिनके करियर, धन, प्रतिष्ठा या स्वास्थ्य में अदृश्य अवरोध बने हुए हों।

 मेरे अनुभव से सत्य (Humanized & Trust-Building Insight)

अपने परामर्श जीवन में मैंने बार-बार यह अनुभव किया है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया सही दान, सही मंत्र और सही भाव, वर्षों से रुके हुए कर्मों में भी धीमी लेकिन स्थायी गति ला देता है।

कई साधकों ने मुझसे साझा किया कि: सूर्य अर्घ्य और संयम से आत्मविश्वास लौटा

शनि से जुड़े मानसिक दबाव कम हुए
कार्यक्षेत्र में स्थिरता और सम्मान प्राप्त हुआ।
इसी कारण मैं मकर संक्रांति को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि कर्म शुद्धि और आत्मिक पुनर्संरचना का वार्षिक अवसर मानती हूं।

 मकर संक्रांति 2026 के शास्त्रसम्मत, सिद्ध और अनुभवजन्य उपाय

ये उपाय ग्रंथ, गुरु परंपरा और मेरे व्यक्तिगत अनुभव—तीनों पर आधारित हैं:

1️⃣ सूर्य अर्घ्य विधि

प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें

तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, रोली और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर

सूर्य को अर्घ्य देते समय यह मंत्र बोलें:
“ॐ घृणि सूर्याय नमः”


2️⃣ मंत्र साधना

उपरोक्त मंत्र का 108 बार जप

जप के समय मन में कृतज्ञता और संकल्प रखें


3️⃣ शनि शांति हेतु दान

तिल, गुड़, काले वस्त्र, कंबल या अन्न का दान

दान करते समय मौन और विनम्रता रखें


4️⃣ आचरण शुद्धि

इस दिन क्रोध, अहंकार, कटु वाणी और आलस्य से दूर रहें

माता-पिता, गुरु और वृद्धों का आशीर्वाद अवश्य लें


 आध्यात्मिक संदेश (मेरे हृदय से)

मकर संक्रांति 2026 हमें यह स्मरण कराती है कि
जब सूर्य दिशा बदलता है, तब मनुष्य को भी अपने जीवन की दिशा बदलनी चाहिए।

यह पर्व सिखाता है कि:

भाग्य शिकायत से नहीं, कर्म से बदलता है।

प्रकाश बाहर नहीं, अंदर से उत्पन्न होता है।


यदि इस दिन को श्रद्धा, विवेक और ज्योतिषीय समझ के साथ अपनाया जाए, तो यह पर्व पूरे वर्ष की ऊर्जा को शुद्ध और सकारात्मक बना सकता है।

आचार्य डॉक्टर सरिता मिश्रा, PhD (Gold Medalist)
🔹 Vedic Jyotish Sikshan Sansthan, New Delhi 

🔹 कुंडली विश्लेषण, हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, टैरो कार्ड रीडिंग, वास्तु परामर्श

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