रोज डे पर रोज के लिए 🌹🌹🌹
ए गुलाब बस तुम मुस्कुराते रहो
खिलखिलाते रहो तुम सदा ही
महकाते रहो,घर आंगन बगिया को ,
जितने दिवस इस जीवन में रहो ।।
छीनकर प्राण ,करना पड़े मुझे
अपने प्रेम को प्रमाणिक यदि,
तो मैं करलूं, चयन इन काटो का
मुझे "तोड़ना " तुझे स्वीकार नहीं।
तुझे तोड़कर मैं दर्शाऊ ,
मेरे मन की प्रीत किसी यदि ,
ऐसे भाव नहीं हैं, प्रिय गुलाब मेरे !
ऐसी कटु, मेरे ह्रदय की प्रीत नही ।।
@आशी प्रतिभा, ग्वालियर