एक दिन धरा का !
सब धरा पर ,
यूं ही धरा रह जाएगा ...........
कर्म तेरे ,जायेंगे साथ
तू खुद धरा पर,
बेसुध यूंही धरा रह जाएगा ,,,,,,
किस बात का गुमान तुझे ,
कुछ न संग जाएगा ,
ये तेरा–मेरा सब यही रह जाएगा ,,,,,
समय गवाया,यदि तूने
तो तु ही पछताएगा
राम नाम के जप से ही, जीवन से पार पायेगा ,,,,,,,,,,,,
Ashi Pratibha Dubey
प्रतिभा दुबे स्वतंत्र लेखिका
जय_श्री_राम