शैलेन्द्र तिवारी
हम उस दौर से गुजर रहे हैं, जब अवसाद ने हमें जकड़ना शुरू कर दिया है। जिस तेजी के साथ हम अवसाद का शिकार हो रहे हैं, वह चौंकाने वाला है। आने वाले आंकड़े और भी चौंका सकते हैं। भविष्य की पीढ़ी को अवसाद के साथ ही जिंदगी को आगे बढ़ाना होगा। उन्हें अवसाद के साथ जीना या फिर अवसाद पर जीतना होगा। या कहें कि उन्हें यह सिखाना होगा।
जब बात अवसाद की हो तो फिर बाबा तुलसी की क्यों न हो, उनकी रामायण की क्यों न हो। यह इसलिए कि अगर आपने राम, रावण और रामायण को समझ लिया तो फिर आप जीवन भर के लिए अवसाद से मुक्त हो जाओगे। एक राजा के बेटे राम को राज्याभिषेक से ठीक कुछ घंटों पहले वनवास जाने का आदेश मिल जाता है...वो बिना विचार करे चल देते हैं। उन्हें अवसाद नहीं होता है, बल्कि वह उसमें मर्यादा पुरुषोत्तम बनते हैं।
रावण, जो पूरा विश्व विजेता बनने निकला था। उसे वापसी में राजा सहस्त्रबाहु कीर्तिबाहु अर्जुुन से हारना पड़ता है, छह महीने कैद में रहकर हर रोज अपमान का घूंट सहना पड़ता है। पिता और बाबा के श्रेय से कैद से मुक्ति मिल जाती है, बावजूद इसके बाली से भी हार कर अपमान सहना पड़ता है। क्या इस विश्वविजेता को अवसाद में नहीं चले जाना चाहिए था? सवाल यहीं पर है, उसके बाद खुद को पहचाना और अपनी कमियों को दूर किया। असर यह हुआ कि यही योद्धा तीनों लोकों को जीतने में कामयाब रहा।
सीता, एक राज्य परिवार की बेटी। जिसने उस समय के सबसे बड़े कुल में अपने पति को चुना और उसे वनवास का चुनाव करना पड़ा। अवसाद नहीं आया...लंका में त्रास मिला, अवसाद नहीं आया। क्योंकि वो राम के भरोसे थीं, भरोसा भी पूरा हुआ। उन्हीं राम को त्याग कर उन्हें फिर जंगल में बाबा बाल्मीक के आश्रम में शरण लेनी पड़ी। क्या अवसाद आया, नहीं आया। जिन राम और अयोध्या का त्याग करके आईं थीं, वही अयोध्या और श्रीराम हाथ जोड़कर वापस अयोध्या में निवास का निवेदन करते रहे, लेकिन सीता त्रिलोकाधिपति का निवेदन अस्वीकार करके चली गईं। मतलब, अवसाद नहीं, शक्ति का एहसास कराकर गईं।
और कितने किरदार याद दिलाऊं, हर किरदार मैँ धैर्य, संयम और साहस है। हर किसी के जीवन में विपरीत हालात हैं, लेकिन हार कोई नहीं मान रहा। हर हालात में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। एक नई शक्ति के साथ नया संदेश दे रहे हैं। तभी तो ऐसे वक्त में बाबा तुलसी की एक चौपाई भी याद रख लेना तो पूरा जीवन बिना अवसाद के गुजर जाएगा।
तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या, विनय, विवेक।
साहस, सुकृति, सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।।
मतलब, बाबा तुलसीदास जी कहते हैं, किसी विपत्ति के समय आपको यह सात गुण बचायेंगे - आपका ज्ञान, आपकी विनम्रता, आपकी बुद्धि, आपके भीतर का साहस, आपके अच्छे कर्म, सही रास्ते पर चलने की आदत और आखिर में ईश्वर पर आपका विश्वास।
तो एक बात याद रखना, जब आपको लगे कि आपके साथ कोई नहीं तो याद रखना कि ईश्वर आपके साथ खड़ा हुआ है। पूरी शक्ति के साथ, बस आपको महसूस करने की जरूरत भर है।