दीपक तिवारी
देवभूमि द्वारका गुजरात में संत श्री प्रेमभिक्षु जी महाराज द्वारा प्रेरित संकीर्तन मंदिर में पिछले 58 साल से संगीतमय अखंड 'श्री राम जय राम जय जय राम' की ध्वनि गूंज रही है। संकीर्तन मंदिर की स्थापना 12 दिसंबर 1967 को की गई थी तब से लेकर आज तक लगातार कीर्तन चल रहा है। एमपी धमाका को 6 साल
पहले इस मंदिर के दर्शन करने का सौभाग्य मिला था, वहां के रामनाम की गूंज आज तक गूंजती है।
संतजनों ने बताया कि समर्थ रामदास स्वामी ने 'श्रीराम जय राम जय जय राम' इस त्रयोदशाक्षरी मंत्र के तेरह करोड़ जाप किए और उन्हें भगवान श्रीराम के साक्षात दर्शन हुए। ईश्वर-नाम की महिमा अपरंपार है , इस कलयुगमें राम नाम ही सुख शांति का मार्ग है और राम नाम ही इस जीवन रूपी सागर से पार उतार सकता है। क्योंकि श्वास कब पूरे हो जाएं यह कोई नहीं जानता। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सच्चे मन से राम नाम का जाप करना चाहिए।
प्रभु प्रेम की नगरी द्वारका में भक्ति के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं। द्वारकाधीश मंदिर की बगल में देवी भुवन मार्ग से गुजरते हुए आपके कान में
श्री राम जयराम जयजय राम की धुन सुनाई देगी। ये धुन यहां पिछले 58 साल से अनवरत जारी है। 24 घंटे सातों दिन, साल भर यह सिलसिला लगातार जारी रहता है। हरिनाम संकीर्तन मंदिर में एक माइक के पास कुछ लोग हारमोनियम, ढोल और झाल के साथ रामधुन गाते रहते हैं। चेहरे बदल जाते हैं, पर रामधुन जारी रहती
है। कीर्तन ही वास्तविक प्रभु प्रेम है। कीर्तन मन को निर्मल करता है, शांत करता है। पापों को हर लेता है। यह राम नाम की खुमारी है, जो दिन-रात चढ़ी रहती है।
स्वामी प्रेम भिक्षु जी महाराज मूल रूप से बिहार में चंपारण के छितौनी के रहने वाले थे, लेकिन वह ईश्वर की प्रेरणा से गुजरात पहुंचे। इस प्रदेश को उन्होंने अपनी भक्ति का केंद्र बनाया।
द्वारका में रामधुन के जाप का अनवरत सिलसिला दशकों से जारी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी इच्छा से कीर्तन में समय देते हैं। मंदिर में अपनी स्वेच्छा से कीर्तन में लंबा समय देने वालों के लिए भोजन-आवास आदि के भी इंतजाम है। स्वामी प्रेम भिक्षु जी महाराज का गुजरात में काफी सम्मान था।
मलूक पीठाधीश्वर श्री राजेन्द्रदास जी महाराज , जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद जी महाराज भी उनका सम्मान करते हुए आज भी अपनी कथाओं में प्रेमलक्षणा भक्ति के संदर्भ में प्रेमभिक्षु जी महाराज का नाम लेते हैं।
स्वामी प्रेम भिक्षु महाराज ब्रह्मलीन हो चुके हैं, लेकिन उनकी प्रेरणा से अखंड और अनवरत हरिनाम संकीर्तन भक्ति का सिलसिला गुजरात के तीन मंदिरों में आज भी जारी है। यह मंदिर हैं- जामनगर में हनुमान मंदिर, सोमनाथ में कृष्ण मंदिर और द्वारका में रामधुन मंदिर। तमाम लोग अपनी श्रद्धा से इस हरिनाम संकीर्तन में हिस्सा लेते हैं।
कुछ लोग घंटों तक तो कुछ लोग कई दिन या महीनों तक भी विश्व कल्याण हेतु विविध जगह पर चल रहे अखंड हरिनाम संकीर्तन यज्ञ में जुड़ते हैं। भगवान से भी बढ़कर है उनका नाम।