एमपी धमाका
विदिशा। बड़ी लड़ाई और संघर्षों के बाद देश के आम लोगों को अपने हक हासिल करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम मिला है, लेकिन अधिकारियों ने इस कानून की बाट लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लोक सूचना अधिकारियों से लेकर प्रथम अपीलीय अधिकारी वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर मनमानी कर रहे हैं। अब तो हालात यह हो गए हैं कि लोगों को सूचना आयोग तक में राहत नहीं मिल पा रही है।
सूचना का अधिकार अधिनियम भ्रष्टाचार रोकने, अधिकारियों की जवाब दे ही तय करने और सरकारी कामों में पारदर्शिता रखने के लिए बना है, लेकिन अधिकारियों की मनमानी कार्यशैली के कारण आज इस कानून की आत्मा बिलख रही है। आरटीआई आवेदन का निराकरण लोक सूचना अधिकारी को 30 दिन के भीतर करना होता है। निराकरण नहीं होने पर प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष अपील करने का प्रावधान किया गया है। अपील अधिकारी को 30 दिन के भीतर सुनवाई कर प्रथम अपील का निराकरण गुण दोष के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं। अपील सुनवाई में अपीलार्थी की उपस्थित अनिवार्य नहीं होती। इसलिए अपील अधिकारी को गुण-दोष के आधार पर अपील आदेश पारित करना चाहिए। लेकिन हाल ही में वन विभाग के विदिशा एसडीओ हिमांशु त्यागी ने प्रथम अपील में अपीलार्थी की गैरमौजूदगी को आधार बनाकर अपील खारिज कर अवैधानिक आदेश पारित करने का नया रिकार्ड बनाया है। जबकि अपील सुनवाई में अपीलार्थी की उपस्थिति स्वैच्छिक होती है। लेकिन एसडीओ वन विभाग ने कौन सी किताब में यह पढ़ लिया, भगवान जाने।