विदिशा, एमपी धमाका
जिस प्रकार परीक्षित को सातवें दिन मरने का श्राप था, वैसे ही सभी मनुष्यों को एक दिन मरना है तो इसमें जितना हो सके भगवान का भजन करें, क्यों भगवान के नाम से अजामिल जैसा महापापी भी तर जाता है। भगवान का सुमिरन तारनहारी होता है, जो मनुष्य को भवसागर से तार देता है।
उक्त प्रवचन कथा व्यास पं. विशालकृष्ण बिट्टू महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष दिए। स्थानीय मोहनगिरि के पास स्थित श्रीकृष्ण धाम कॉलोनी में सिद्ध सियाराम आयोजन सेवा समिति के तत्वाधान में कथा का आयोजन किया जा रहा है। महाराजश्री ने आगे कहा कि मनुष्य को हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए। उसे दूसरे के सुख से कभी भी दुखी नहीं होना चाहिए और दूसरे के दुख से खुश नहीं होना चाहिए, बल्कि दूसरे के दु:ख-सुख में भागी बनना चाहिए।
*कथा के दौरान समिति के ओमप्रकाश मांझी, राजू कुशवाहा, राहुल राजपूत, भूरा धाकड़, अनिल धाकड़, हरिओम धाकड़, आकाश भाई, मनोज भैया, रामकृष्ण धाकड़, सौरभ प्रजापति, सुनील साहू, जितेंद्र महिलाएं शकुन भाई कलाबाई समस्त कॉलोनीवासी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। तीसरे दिन की कथा के समापन पर प्रसादि वितरित की गई।