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कलेक्टर का कहना साफ..आने वाली पीढ़ी नहीं करेगी माफ...! जिला गंगा समिति की बैठक में उठा नदियों का मुद्दा...!


विदिशा, एमपी धमाका 

कलेक्टर अंशुल गुप्ता की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट स्थित बेतवा सभागार में जिला गंगा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन मंडलाधिकारी हेमंत यादव, जिला पंचायत सीईओ ओपी सनोडिया सहित समिति के सदस्यगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में जिले की नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और सतत निगरानी को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। कलेक्टर श्री गुप्ता ने निर्देश दिए कि जिले की सभी नदियों के किनारे बसे ग्रामों में एक-एक पंजी (रजिस्टर) संधारित किया जाए। इस पंजी में नदी से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी, जिसमें नदी में मिलने वाली सहायक नदियों, अन्य जल स्रोतों से आने वाले पानी, तथा जल की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया जाएगा।

कलेक्टर ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि नदियों में पहुंचने वाले जल की शुद्धता पर सतत निगरानी रखी जाए और प्रदूषण के संभावित स्रोतों की पहचान कर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर समुदाय की भागीदारी से नदियों के संरक्षण का कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने विभागीय दायित्वों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर नदी संरक्षण गतिविधियों को गति दें। स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नदी स्वच्छता अभियान से जोड़ने का आह्वान किया गया।

यह बैठक जिले में नदी संरक्षण की दिशा में एक समन्वित प्रयास का संकेत देती है, जिससे भविष्य में नदियों के जल की गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

नदियों की मिट्टी के कटाव को रोकने पर चर्चा 

जिला गंगा समिति की बैठक में नदियों के किनारों पर बढ़ते मिट्टी के कटाव (तट क्षरण) को गंभीरता से लेते हुए इसके रोकथाम हेतु ठोस प्रबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि नदी तटों पर जहां-जहां कटाव की स्थिति अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षात्मक कार्य किए जाएं। इसके अंतर्गत तट सुदृढ़ीकरण, पौधारोपण, घास पट्टी विकास, बोल्डर पिचिंग तथा जैविक अवरोध (बायो-फेंसिंग) जैसे उपाय अपनाए जाएंगे। इन कार्यों से न केवल मिट्टी का कटाव रुकेगा, बल्कि नदी तटों की स्थिरता भी बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु से पूर्व संवेदनशील स्थलों की पहचान कर कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि समय रहते सुरक्षा कार्य पूरे हो सकें। ग्राम पंचायतों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा और मनरेगा जैसी योजनाओं के माध्यम से श्रम प्रधान कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।

वन विभाग को नदी किनारों पर स्थानीय प्रजातियों के पौधारोपण का दायित्व सौंपा गया है, जिससे हरित आवरण बढ़े और भूमि का क्षरण कम हो। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को नदी किनारे अतिक्रमण एवं अवैज्ञानिक खुदाई से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सभी से अपेक्षा व्यक्त की गई है कि इन उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि कृषि भूमि की सुरक्षा और जल स्रोतों के संरक्षण में भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

“ आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ जल, बेहतर भूमि और सुरक्षित पर्यावरण दें” - कलेक्टर

 जिला गंगा समिति की बैठक में कलेक्टर श्री गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी स्पष्ट और संवेदनशील अपेक्षाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी, बेहतर जमीन और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ी को विरासत में देना हम सबका नैतिक दायित्व है।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है। यदि वर्तमान पीढ़ी जल स्रोतों, नदियों, भूमि और वन संपदा की सुरक्षा के लिए गंभीर प्रयास नहीं करेगी, तो भविष्य की पीढ़ियों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों और समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी योजना न मानकर जन आंदोलन के रूप में अपनाया जाए।

उन्होंने विशेष रूप से नदियों की स्वच्छता, जल संरक्षण, भूमि कटाव को रोकने तथा वृक्षारोपण जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि ग्राम स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर लोगों को यह समझाना जरूरी है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सीधे उनके जीवन और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि सामूहिक प्रयासों से ही स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण की नींव रखी जा सकती है। प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपी जा सके।

 

“समिति के उत्कृष्ट कार्य धरातल पर दिखें” - कलेक्टर

 जिला गंगा समिति की बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समिति की सदस्यता केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक सदस्य की सकारात्मक उपलब्धियां धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण, जल स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन जैसे विषय केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इनसे जुड़े कार्यों का वास्तविक असर क्षेत्र में नजर आना चाहिए।

                कलेक्टर श्री गुप्ता ने वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, राजस्व विभाग, उद्यानिकी, कृषि, जल संसाधन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगरीय निकायों के अधिकारियों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप ठोस कार्य करें और उनके परिणाम भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नदी तटों का संरक्षण, पौधारोपण, जल स्रोतों की स्वच्छता, अवैध प्रदूषण पर नियंत्रण तथा जनजागरूकता गतिविधियों में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक विभाग अपनी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन करे और प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक सहभागिता के बिना पर्यावरण संरक्षण के प्रयास पूर्ण नहीं हो सकते।

बैठक में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया कि समिति का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श नहीं, बल्कि ठोस और मापनीय परिणाम प्राप्त करना है, ताकि नदी संरक्षण के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव आमजन के जीवन में महसूस किया जा सके।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि जल गंगा समिति में केवल शामिल होना नहीं चाहिए बल्कि हरेक सदस्य की पॉजिटिव उपलब्धियां धरातल पर दिखें। ततसंबंध में उन्होंने वन विभाग पंचायत ग्रामीण विकास विभाग राजस्व विभाग, उद्यान , कृषि, जलसंसाधन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और निकायों के अधिकारियों तथा एनजीओ के प्रतिनिधियों से कहा है।


जिला प्रशासन द्वारा नदियों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कलेक्टर श्री गुप्ता ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों में किसी भी प्रकार का औद्योगिक अपशिष्ट जल न मिलने पाए तथा किसी भी स्थिति में नदी का जल प्रदूषित न हो।
औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन के संबंध में उद्योग निरीक्षक को निर्देशित किया गया कि वे शीघ्रता से जिले में संचालित सभी छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों की सूची तैयार करें। प्रत्येक उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल की मात्रा एवं गुणवत्ता का विस्तृत विवरण संकलित किया जाए। साथ ही यह भी चिन्हित किया जाए कि यह अपशिष्ट जल किन-किन माध्यमों से बाहर जाता हैकृजैसे नदियों, नालों या भूमि में रिसाव के रूप में। प्रदूषणकारी उद्योगों जैसे रंग, चमड़ा, डेयरी आदि को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उनकी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा करने को कहा गया।

बैठक में अस्पतालों के अपशिष्ट जल प्रबंधन, जलीय जीवों की स्थिति, नदी किनारे वनीकरण कार्यक्रम, सहायक नदियों के महत्व, नदी किनारे अवैध निर्माण पर प्रतिबंध तथा नदियों में अपशिष्ट जल निषेध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। शहरी क्षेत्रों में नदी प्रवाह में आ रही गिरावट की समस्याओं को चिन्हित कर समाधानात्मक उपायों पर विचार किया गया। साथ ही नदी किनारों पर दो से तीन किलोमीटर तक वनीकरण पट्टी विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक के दौरान पूर्व में किए गए कार्यों की प्रगति की जानकारी साझा की गई तथा भविष्य की कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले की नदियों की स्वच्छता, पारिस्थितिक संतुलन और जल गुणवत्ता को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित रखा जा सके।

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