श्री महाकाल वन मेला में लगे 250 स्टॉलों पर आयुर्वेदिक उत्पादों की हो रही बिक्री
उज्जैन, एमपी धमाका
दशहरा मैदान पर वन विभाग द्वारा आयोजित 6 दिवसीय वन मेले में अकाष्ठीय वनोपज, ग्रामीण आजीविका, हर्बल उद्यमिता, संरक्षण, प्रसंस्करण और विपणन के स्टॉल पर लोगों की भीड़ लगी है। मेले में लगे 250 स्टॉलों पर वनोपज, आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री की जा रही है। मेले में परम्परागत वैद्यों द्वारा नब्ज देखकर नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श के साथ आयुर्वेद और जड़ीबुटियों के माध्यम से उपचार भी दिया जा रहा है। मेले में प्रतिदिन लोग चिकित्सीय परामर्श का लाभ उठा रहे है।
वन विभाग द्वारा आयोजित 06 दिवसीय श्री महाकाल वन मेले में 250 भव्य, आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें 76 स्टॉल प्राथमिक लघु वनोपज समितियों और वन धन केंद्रों के हैं वहीं 76 स्टॉल निजी क्षेत्र के उद्यमियों के हैं। 16 स्टॉल विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी के लिए हैं, 16 स्टॉल वन आधारित फूड ज़ोन के हैं। मेले का शुभारंभ 11 फरवरी को होने के बाद से ही वनोपज और आयुर्वेद का लाभ लेने के लिए लोगों का रुझान दिखाई दे रहा है। यहां 50 स्टॉल निःशुल्क आयुर्वेदिक ओपीडी के लिए समर्पित किए गए हैं। इन स्टॉल में 50 आयुर्वेदिक डॉक्टर और पारंपरिक वैद्य सेवाएं दे रहे है।
नब्ज देखकर जान रहे रोग
श्री महाकाल वन मेले में परम्परागत वैद्यों द्वारा नब्ज देखकर नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श के साथ आयुर्वेद और जड़ीबुटियों के माध्यम से उपचार भी दिया जा रहा है। प्रतिदिन मेले में आने वाले लोग वेद्य से रोगों के उपचार के निशुल्क परामर्श के बाद रोग निदान के लिए आयुर्वेदिक औषधि और जड़ीबुटियों की खरीददारी कर रहे है। जबलपुर से आए वैद्य संतोष आनंद जायसवाल ने बताया कि उनके स्टॉल पर अधिकांश रोगी गाठियावात, मिर्गी, माइग्रेन, दमा, भगंदर, बबासीर, साइटिका, पीलिया, किडनी रोग के अलावा प्रोस्टेट केंसर के रोगी भी निशुल्क परामर्श लेने के बाद जड़ीबुटियों के माध्यम से इलाज करा रहे है। वैद्य श्री जायसवाल विगत 19 वर्षों से वन विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले वन मेले में रोग परीक्षण के लिए अपनी सेवाएं दे रहे है। उनका कहना है कि जटिल रोगों का इलाज भी आयुर्वेदिक औषधियों और जडीबुटियों से किया जा रहा है।
मेले में पारंपरिक खान-पान का स्वाद भी ले रहे है
श्री महाकाल वन मेले में लगे फूड ज़ोन में बांधवगढ़ के गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा की वन भोज रसोई और अलीराजपुर का पारंपरिक दाल-पानिया के स्टॉल पर लोग पारंपरिक खान-पान का स्वाद भी ले रहे है। साथ ही दोना-पत्तल निर्माण, शहद, लाख, कोदो-कुटकी, सबई रस्सी जैसे उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन हो रहा है। मेले में महुआ फूल, महुआ गुल्ली, साल बीज, अचार गुठली, आंवला, जामुन, बेल फल एवं चकोंडा बीज जैसे प्रमुख उत्पाद भी विक्रय हो रहे है।
वन मेले में चीता परिवार एवं डायनासोर का विशाल स्कल्पचर बन रहा आकर्षण का केंद्र
श्री महाकाल वन मेले में लगाए गए चीता परिवार और डायनासोर का विशाल स्कल्पचर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्कल्पचर देखने के लिए लोगों की भीड लग रही है। मेले में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिये व्हीलचेयर एवं गोल्फ कॉर्ट की सुविधा, ओपीडी में उपचार कराने वाले लोगों के लिए पृथक से बैठक व्यवस्था, बच्चों के लिए आकर्षक एवं मजेदार किड्स जोन की सुविधा भी है।