विदिशा, एमपी धमाका
श्री दादाजी मनोकामना पूर्ण सिद्ध श्री हनुमान मंदिर रंगई पुल विदिशा में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला रामनवमी का त्योहार विधि-विधान के साथ मनाया गया।
अभिषेक श्रंगार के बाद दोपहर 12 बजे हुई महाआरती में मंदिर परिसर भये प्रकट कृपाला दीन दयाला..के स्वरों से गुंजायमान हो उठा। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रामचरितमानस का पाठ और शोभायात्राएं आयोजित की गईं।
रामनवमी केवल एक धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद करने का अवसर भी है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे दिन भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान राम की आराधना करते हैं।
इस दिन व्रत रखने की विशेष परंपरा है। भक्त सुबह स्नान के बाद भगवान राम की पूजा करते हैं और दिनभर फलाहार या उपवास रखते हैं। दोपहर के समय, जिसे भगवान राम के जन्म का समय माना जाता है, विशेष पूजा की जाती है। इस दौरान राम जन्मोत्सव मनाया जाता है और मंदिरों में घंटों-घड़ियालों की गूंज के बीच आरती होती है।
रामनवमी को धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। भगवान राम ने अपने जीवन में आदर्श पुत्र, आदर्श राजा और आदर्श पति का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। यही कारण है कि रामनवमी का पर्व लोगों को नैतिक मूल्यों की याद दिलाता है।