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अब जांच के नाम पर मामला लंबित नहीं रख सकेगी पुलिस, प्रारंभिक जांच 14 दिनों में पूरी करना अनिवार्य


मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सभी जिलों को जारी किया परिपत्र
भोपाल । मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा जारी यह परिपत्र मुख्य रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के सख्ती से पालन के लिए है।
​इस नए निर्देश का मुख्य उद्देश्य पुलिस द्वारा जांच के नाम पर शिकायतों को महीनों तक लटकाए रखने की प्रवृत्ति को खत्म करना है। 

इस परिपत्र के मुख्य बिंदु - 
​1~ 14 दिनों की समय सीमा (Deadline) :
​अब पुलिस किसी भी शिकायत पर 'प्रारंभिक जांच' (Preliminary Inquiry) को 14 दिनों से अधिक नहीं खींच पाएगी। इस अवधि के भीतर पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि
​अपराध संज्ञेय (Cognizable) है और FIR दर्ज की जानी चाहिए या
​शिकायत में कोई दम नहीं है और इसे नस्तीबद्ध (Close) किया जाना चाहिए।

​2~ किन मामलों में होगी 'प्रारंभिक जांच' -
​सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, हर मामले में प्रारंभिक जांच जरूरी नहीं है। यदि शिकायत से सीधे तौर पर किसी गंभीर अपराध का पता चलता है, तो FIR तुरंत होनी चाहिए। प्रारंभिक जांच केवल इन श्रेणियों में की जा सकती है-
पारिवारिक या वैवाहिक विवाद।
​व्यावसायिक अपराध (Commercial Offences)।
​चिकित्सा लापरवाही (Medical Negligence) के मामले।
​भ्रष्टाचार के मामले।
​ऐसे मामले जहां शिकायत दर्ज कराने में बहुत अधिक देरी (जैसे 3 महीने से ज्यादा) हुई हो।

​3. पारदर्शिता और जवाबदेही;
​GD एंट्री अनिवार्य : 
शिकायत मिलते ही उसकी प्रविष्टि जनरल डायरी (GD) में करना अनिवार्य है, चाहे उस पर FIR हो या जांच।

• ​शिकायतकर्ता को सूचना : यदि 14 दिनों के बाद पुलिस केस बंद करने का निर्णय लेती है, तो इसकी सूचना और कारण शिकायतकर्ता को एक सप्ताह के भीतर लिखित में देना होगा।

• ​देरी पर कार्रवाई : 
यदि बिना किसी ठोस कारण के जांच 14 दिनों से ऊपर जाती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

​4. इसका आम जनता पर  प्रभाव -
• ​त्वरित न्याय : 
अब पुलिस "जांच चल रही है" कहकर महीनों तक चक्कर नहीं लगवा सकेगी।
• ​भ्रष्टाचार पर रोक : 
समय सीमा तय होने से मामले को दबाने या लेनदेन की गुंजाइश कम होगी।
• ​स्पष्टता : 
पीड़ित को 14 दिनों में यह पता चल जाएगा कि उसकी शिकायत पर कानूनी कार्रवाई हो रही है या नहीं।

यदि आपकी शिकायत पर 14 दिनों के भीतर कोई पुलिस द्वारा निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आप इस परिपत्र और सुप्रीम कोर्ट के 'ललिता कुमारी' जजमेंट का हवाला देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (SP या DIG) को आवेदन दे सकते हैं।

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