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जिला पंचायत अध्यक्ष ने उठाई अधिकारों की मांग; कहा- 'बिना अधिकारों के दिखावा साबित हो रहे पद'


विदिशा, एमपी धमाका 
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर विदिशा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता रघुवंशी ने प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर गंभीर विचार साझा किए हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को याद करते हुए कहा कि गाँवों के पूर्ण विकास के बिना सशक्त भारत की कल्पना संभव नहीं है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पंचायतों में महिलाओं को दिए गए 50% आरक्षण की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व तो बढ़ा है, लेकिन अब बारी अधिकारों के विकेंद्रीकरण की है।

अधिकारों में कटौती: 

जिला पंचायत अध्यक्ष ने चिंता जताई कि जिला और जनपद स्तर के जनप्रतिनिधियों के पास आज वित्तीय शक्तियां अत्यंत सीमित हैं। खनिज मद और स्टाम्प शुल्क जैसे राजस्व स्रोतों में पंचायत राज संस्थाओं की भागीदारी कम होने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

प्रशासनिक हस्तक्षेप: 

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में कार्य सीधे संचालनालय स्तर से तय हो रहे हैं, जिसमें स्थानीय निर्वाचित जिला पंचायत निकायों की अनुशंसा को दरकिनार किया जा रहा है।

अन्य राज्यों का उदाहरण:
 उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की तर्ज पर पंचायत प्रतिनिधियों को शक्तिशाली बनाने की मांग की।

व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता: 

उन्होंने दो टूक कहा कि यदि त्रिस्तरीय पंचायती राज को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए जाते, तो इन पदों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। बिना अधिकारों के चुनाव प्रक्रिया केवल जनता के धन की बर्बादी और सामाजिक वैमनस्यता को जन्म देती है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को कम से कम स्वेच्छा अनुदान और विकास कार्यों की अनुशंसा के वास्तविक अधिकार दिए जाएं, ताकि वे जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान कर सकें।

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