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कलेक्टर के निर्देशों की अवहेलना कर रहे जिला आयुष अधिकारी..!


विदिशा, एमपी धमाका 
विदिशा जिले में मेडिकल स्टोर्स और कथित झोलाछाप वैद्य/चिकित्सकों के खिलाफ की गई शिकायतों को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। कारण बताओ नोटिस के बाद जिला आयुष अधिकारी डॉ दिनेश अहिरवार को कलेक्टर कार्यालय से जारी स्मरण-पत्र ने आयुष विभाग में हलचल मचा दी है।
कार्यालय कलेक्टर जिला विदिशा द्वारा जिला आयुष अधिकारी को जारी स्मरण-पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रमाणों सहित की गई शिकायतों पर मांगी गई जानकारी एवं स्पष्ट प्रतिवेदन अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह मामला मेडिकल स्टोर्स और फर्जी वैद्य के विरुद्ध की गई शिकायत से जुड़ा हुआ है।
दस्तावेज के अनुसार, जिला आयुष अधिकारी द्वारा पूर्व में कारण बताओ सूचना पत्र का जवाब प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उसके परीक्षण के बाद कलेक्टर के निर्देशानुसार चार बिंदुओं पर विस्तृत एवं स्पष्ट प्रतिवेदन मांगा गया था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी द्वारा आज दिनांक तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
स्मरण-पत्र में यह भी कहा गया है कि यह स्थिति कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना को दर्शाती है। जिला सतर्कता अधिकारी ने संबंधित पत्र की प्रति पुनः भेजते हुए तत्काल स्पष्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी विपरीत परिस्थिति के लिए संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
दस्तावेज की प्रतिलिपि भोपाल संभाग आयुक्त तथा शिकायतकर्ता को भी भेजी गई है, जिससे मामला और अधिक गंभीर माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जिले में फर्जी चिकित्सा गतिविधियों और अवैध मेडिकल संचालन को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। अब कलेक्टर की सख्ती के बाद विभाग पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है।

“सवाल सिर्फ जवाब का नहीं, जनता की जिंदगी से जुड़े सिस्टम की जवाबदेही का है।”

कलेक्टर द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से जिला आयुष अधिकारी से कई गंभीर बिंदुओं पर जवाब मांगा गया था, जिसमें बिना बिल दवा बिक्री, बिना डिग्री आयुर्वेद प्रैक्टिस और मेडिकल स्टोर्स की अनियमितताओं पर कार्रवाई को लेकर जानकारी तलब की गई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस मामले में कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या थे कलेक्टर के सवाल?
बिना पर्ची दवा बिक्री पर कार्रवाई क्यों नहीं?
फर्जी आयुर्वेद प्रैक्टिस पर नियंत्रण क्यों नहीं?
नियम उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं किए गए?
प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
सूत्रों के अनुसार, समय पर जवाब नहीं देने को गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इस मामले में सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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