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टैक्सपेयर्स के पैसों पर नौकरी, फिर भी जनता से अफसरशाही..!


शुल्क लेने के बाद नागरिक को दिया फरमान – “कार्यालय आकर जानकारी प्राप्त करें”, जिला पंचायत विदिशा के लोक सूचना अधिकारी पर आरटीआई कानून उल्लंघन के आरोप

विदिशा, एमपी धमाका 
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर जिला पंचायत विदिशा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरटीआई आवेदक ने जिला पंचायत के लोक सूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सूचना उपलब्ध कराने के नाम पर पहले शुल्क जमा कराया गया और उसके बाद आवेदक को आदेशात्मक भाषा में कार्यालय में उपस्थित होकर जानकारी लेने के लिए पत्र जारी कर दिया गया।
मामला जिला पंचायत विदिशा के पत्र क्रमांक 2498/लो.सू.अधि./जि.पं./2026 दिनांक 10 अप्रैल 2026 से जुड़ा है। पत्र में लिखा गया है कि आरटीआई आवेदन के तहत मांगी गई जानकारी 178 पृष्ठों में उपलब्ध है तथा “कार्यालय में उपस्थित होकर जानकारी प्राप्त करें।”
आवेदक का आरोप है कि जब सूचना शुल्क के रूप में राशि जमा करा ली गई थी, तब नियमानुसार दस्तावेज निर्धारित माध्यम से उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे। इसके विपरीत उन्हें कार्यालय बुलाने की भाषा अपनाई गई, जो न केवल आदेशात्मक है बल्कि आरटीआई अधिनियम की भावना के विपरीत भी बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि आवेदक ने इस संबंध में लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा “कार्यालय आकर जानकारी प्राप्त करें” कहना नागरिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी जनता के टैक्स से वेतन लेते हैं, इसके बावजूद आम नागरिकों से ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो सूचना मांगना कोई अपराध हो।
आवेदक ने अपने जवाब में यह भी उल्लेख किया है कि आरटीआई कानून के तहत मांगी गई सूचना उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है, न कि आवेदक को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना। उन्होंने लोक सूचना अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे “आरटीआई प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन” बताया।
अब इस मामले ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा इस बात की भी है कि जब सूचना उपलब्ध थी और शुल्क जमा हो चुका था, तो फिर दस्तावेज सीधे उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए?
सूत्रों के अनुसार मामला अब उच्च अधिकारियों तक पहुंच सकता है और राज्य सूचना आयोग में शिकायत की तैयारी भी की जा रही है। जिले में यह मामला प्रशासनिक कार्यशैली और पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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