सिस्टम से थक चुके हैं? शिकायत करने पर भी नहीं हो रही कार्रवाई? अब और नहीं सहना!
एमपी धमाका
शिकायत पर शिकायत, आवेदन पर आवेदन, लेकिन कार्रवाई शून्य? अगर आपकी जायज मांगें और समस्याएं अधिकारियों की फाइलों में दबकर रह गई हैं, तो हार मानने की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में नागरिक सिर्फ फरियादी नहीं, बल्कि अधिकारों से संपन्न संवैधानिक शक्ति भी है। जब प्रशासनिक तंत्र जवाब देना बंद कर दे, तब कानून, सूचना का अधिकार, शिकायत निवारण पोर्टल, न्यायालय और मीडिया आपके सबसे बड़े हथियार बन जाते हैं। सवाल यह नहीं कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई, बल्कि यह है कि अब आगे कौन-सा रास्ता अपनाया जाए।
सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही से आप अकेले नहीं लड़ रहे हैं। जब हर दरवाज़ा खटखटाने के बाद भी न्याय की उम्मीद न दिखे, तो निराशा होना स्वाभाविक है। लेकिन याद रखें, तंत्र कितना भी खराब क्यों न हो, कानून का डंडा सबसे ऊपर है।
निचले स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक के अधिकारी यदि आपकी जायज शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो अब वक्त है अपने संवैधानिक अधिकारों और कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का। प्रशासनिक रास्ते बंद हों, तो ये रास्ते खुले हैं —
1. RTI (सूचना का अधिकार) को बनाएं हथियार
अधिकारी कार्रवाई न करें, लेकिन RTI का जवाब देने के लिए बाध्य हैं। जिन-जिन अधिकारियों या विभागों को आपने शिकायत दी है, उनके लोक सूचना अधिकारी के नाम सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन लगाएं।
मांग करें — "मेरी शिकायत दिनांक ......... पर अब तक की गई कार्रवाई की प्रमाणित जानकारी तथा संबंधित फाइल नोटिंग की प्रमाणित प्रति 30 दिन की निर्धारित अवधि के भीतर उपलब्ध कराई जाए।"
शिकायत की प्रति और उसकी प्राप्ति रसीद भी संलग्न करें। इससे संबंधित अधिकारी पर जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई का दबाव बनेगा।
2. Vigilance और ACB (भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां)
यदि आपकी शिकायत पर कार्रवाई न होने के पीछे रिश्वत, पक्षपात या किसी अधिकारी की दुर्भावनापूर्ण मंशा की आशंका हो, तो सतर्कता विभाग, लोकायुक्त या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का रुख करें। कानून की नजर में कोई भी अधिकारी अछूता नहीं है।
3. उच्च शिकायत निवारण पोर्टल का उपयोग करें
केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों में CPGRAMS पोर्टल या ऐप पर तथ्यों और दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज करें। इन शिकायतों की निगरानी उच्च स्तर पर की जाती है, इसलिए अधिकारी इन्हें गंभीरता से लेते हैं।
राज्य सरकार से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें। मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी के कारण इन मामलों में जवाबदेही बढ़ जाती है।
4. न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं
जब सभी प्रशासनिक उपाय विफल हो जाएं, तब उच्च न्यायालय में 'परमादेश (Mandamus)' याचिका दायर की जा सकती है। न्यायालय संबंधित अधिकारी को उसका वैधानिक दायित्व निभाने के लिए निर्धारित समय सीमा में आदेश जारी कर सकता है।
5. सोशल मीडिया और मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करें
अपने दस्तावेज, RTI के जवाब और अधिकारियों की उदासीनता को तथ्यों के साथ सार्वजनिक करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और प्रिंट मीडिया के माध्यम से अपनी बात जिम्मेदारी और प्रमाणों के साथ सामने रखें।
आज के डिजिटल युग में सरकारें और प्रशासनिक अधिकारी सोशल मीडिया पर उठाए गए गंभीर और तथ्यात्मक मुद्दों का भी संज्ञान लेते हैं।
अपने दस्तावेज संभालकर रखें
हर शिकायत की प्रति, प्राप्ति रसीद, डाक की रसीद, RTI आवेदन, प्राप्त जवाब और अन्य सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें। यही दस्तावेज आगे चलकर आपके सबसे मजबूत कानूनी और प्रशासनिक हथियार साबित होते हैं।
याद रखिए, अधिकार मांगने से नहीं, उन्हें जानने और इस्तेमाल करने से मिलते हैं।