एमपी धमाका
मुंबई। भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे हैं, जिन्हें अभिनेता से अलग कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। मुकेश खन्ना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कभी वे ‘महाभारत’ के भीष्म पितामह बनकर घर-घर पहुंचे तो कभी ‘शक्तिमान’ और गंगाधर के रूप में बच्चों के चहेते बन गए। लेकिन पर्दे पर दिखाई देने वाली इस सफलता के पीछे संघर्ष, असफलता, जोखिम और कई दिलचस्प किस्से छिपे हैं।
जब ‘शक्तिमान’ सिर्फ एक सपना था
बहुत कम लोगों को पता है कि ‘शक्तिमान’ का विचार मुकेश खन्ना के मन में आज से कई दशक पहले आया था। उन्होंने 1981 के आसपास एक भारतीय सुपरहीरो की कल्पना की थी। उस समय भारत में सुपरहीरो का मतलब मुख्यतः विदेशी किरदारों से था। खन्ना चाहते थे कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़ा अपना सुपरहीरो हो।
पहले इसे फिल्म के रूप में बनाने की कोशिश हुई, लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ सकी। वर्षों बाद यही विचार टीवी सीरियल के रूप में सामने आया और 1997 में ‘शक्तिमान’ ने भारतीय टेलीविजन पर दस्तक दी।
‘शक्तिमान’ शुरू करने के लिए लेना पड़ा था उधार
आज करोड़ों दर्शकों की यादों का हिस्सा बन चुका ‘शक्तिमान’ बहुत आसान परिस्थितियों में शुरू नहीं हुआ था। मुकेश खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शो को शुरू करने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत पड़ी और उन्होंने दोस्त से पैसे उधार लिए थे। यानी जिस सुपरहीरो को बाद में देश ने सिर-आंखों पर बैठाया, उसकी शुरुआत आर्थिक संघर्ष से हुई थी।
गंगाधर के दांतों का राज
शक्तिमान के बिल्कुल उलट गंगाधर का मजेदार और मासूम चेहरा आज भी दर्शकों को याद है। खास बात यह है कि गंगाधर का लुक पूरी तरह संयोग नहीं था। मुकेश खन्ना ने बताया था कि इसके पीछे अमेरिकी कॉमेडियन जेरी लुईस से मिली प्रेरणा थी। खास तौर पर बड़े सामने के दांतों वाला अंदाज उसी प्रेरणा से जुड़ा था।
‘महाभारत’ ने बदल दी पूरी जिंदगी
‘महाभारत’ से पहले मुकेश खन्ना फिल्मों में काम कर चुके थे, लेकिन उन्हें वह पहचान नहीं मिल पा रही थी जिसकी उन्हें तलाश थी। खुद उनके पुराने इंटरव्यू का हवाला देते हुए रिपोर्टों में बताया गया है कि उस दौर में उन्हें असफल अभिनेता तक कहा जाने लगा था।
फिर आया बी.आर. चोपड़ा का ‘महाभारत’ और भीष्म पितामह का किरदार। इस भूमिका ने उनकी पहचान ही बदल दी।
भीष्म और शक्तिमान—दो बिल्कुल अलग चेहरे
एक तरफ शांत, गंभीर और त्याग की प्रतिमूर्ति भीष्म पितामह और दूसरी तरफ बच्चों को बुराई से लड़ने की सीख देने वाला शक्तिमान। दोनों किरदार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन दोनों ने मुकेश खन्ना की पहचान को मजबूत किया।
यही वजह रही कि बाद में दर्शक उन्हें नायक और आदर्शवादी भूमिकाओं में देखने के इतने आदी हो गए कि उनकी स्क्रीन इमेज भी बदल गई।
‘शक्तिमान’ में सुपरपावर से ज्यादा जरूरी थी अंदर की शक्ति
मुकेश खन्ना आज भी शक्तिमान को केवल एक कॉस्ट्यूम पहने सुपरहीरो के रूप में नहीं देखते। 2025 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि शक्तिमान की असली ताकत गैजेट्स नहीं बल्कि उसकी आंतरिक शक्ति और भारतीय मूल्य हैं। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक और प्रस्तुति बदली जा सकती है, लेकिन किरदार की आत्मा नहीं बदलनी चाहिए।
हवा में उड़ने वाले सीन भी आसान नहीं थे
आज के दौर में कंप्यूटर ग्राफिक्स से बहुत कुछ संभव है, लेकिन ‘शक्तिमान’ के शुरुआती दौर में तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी। उड़ने और एक्शन वाले दृश्यों के लिए तारों, स्कैफोल्डिंग और दूसरे व्यावहारिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था। ऐसे दृश्यों की शूटिंग अपने आप में जोखिम भरी होती थी।
बच्चों को गलत संदेश न मिले, इसकी भी चिंता थी
‘शक्तिमान’ की लोकप्रियता के साथ यह चिंता भी सामने आई कि कहीं बच्चे टीवी पर दिखाए गए स्टंट को असल जिंदगी में दोहराने की कोशिश न करें। मुकेश खन्ना ने शो के दौरान बच्चों को बार-बार समझाया कि शक्तिमान की शक्तियां वास्तविक नहीं हैं और टीवी पर दिखाए गए खतरनाक स्टंट की नकल नहीं करनी चाहिए।
शादी को लेकर भी टूटती रही गलतफहमी
मुकेश खन्ना के अविवाहित रहने को अक्सर भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा से जोड़कर देखा गया। लेकिन उन्होंने इस धारणा को खारिज किया है। उनका कहना रहा है कि उन्होंने भीष्म की तरह कोई प्रतिज्ञा लेकर शादी नहीं छोड़ी। यह उनके जीवन का व्यक्तिगत फैसला और परिस्थितियों से जुड़ा विषय है।
आज भी बेबाक अंदाज कायम
मुकेश खन्ना उम्र के इस पड़ाव पर भी अपनी बेबाक राय के लिए चर्चा में रहते हैं। हाल के दिनों में उन्होंने ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बयान दिया, जिस पर विवाद खड़ा हुआ। उनके दावे के एक हिस्से को लेकर फैक्ट-चेक भी सामने आया, जिसमें ‘जन गण मन’ के इतिहास संबंधी दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया।
हाल ही में वे हिंदी में ‘शिव तांडव स्तोत्र’ प्रस्तुत करने को लेकर भी चर्चा में रहे। उनके साथ गायक शान भी जुड़े। इस प्रस्तुति का उद्देश्य संस्कृत स्तोत्र के भाव और अर्थ को नई पीढ़ी तक आसान रूप में पहुंचाना बताया गया।
शक्तिमान सिर्फ एक किरदार नहीं, एक दौर का नाम है
मुकेश खन्ना की कहानी की खासियत यही है कि उन्होंने केवल किरदार नहीं निभाए, बल्कि उन किरदारों को भारतीय दर्शकों की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बना दिया। भीष्म ने उन्हें गंभीरता दी, शक्तिमान ने लोकप्रियता और गंगाधर ने हास्य के साथ घर-घर की पहचान।
आज भी जब टीवी की पुरानी यादों की बात होती है तो शक्तिमान का नाम जरूर आता है। शायद यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी सफलता है—जब उसका किरदार पर्दे से निकलकर कई पीढ़ियों की यादों में हमेशा के लिए बस जाए।