Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

तमाशबीन समाज और कानून के बीच पिसती मासूमियत...


बिहार के जमुई से सामने आया नाबालिग छात्रा से बदसलूकी का मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक चरित्र के सामने खड़ा एक बेहद गंभीर सवाल है। रास्ते में एक छात्रा को रोकना, उसके साथ कथित तौर पर अभद्रता करना और फिर पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना बताता है कि अपराध की मानसिकता किस हद तक संवेदनहीन हो सकती है।
सबसे पीड़ादायक पहलू यह है कि जिस समय एक बेटी मदद के लिए गुहार लगा रही थी, उस समय कुछ लोग उसकी पीड़ा को रोकने के बजाय उसे कैमरे में कैद करने और तमाशा बनाने में लगे थे। मोबाइल कैमरा आज हमारे हाथ में है, लेकिन उसका इस्तेमाल हमारी सोच को भी आईना दिखाता है।
ऐसी घटनाओं में सवाल केवल आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या हमारी सामाजिक संवेदनशीलता इतनी कमजोर हो गई है कि किसी की अस्मिता और पीड़ा भी सोशल मीडिया के लिए महज 'कंटेंट' बन गई?
कानून को अपना काम कठोरता और निष्पक्षता से करना चाहिए। पीड़िता की पहचान और गरिमा की पूरी सुरक्षा होनी चाहिए तथा घटना का वीडियो प्रसारित करने वालों पर भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इसके साथ समाज को भी अपनी भूमिका तय करनी होगी।
जरूरत है तमाशबीन बनने की नहीं, संवेदनशील नागरिक बनने की।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |