30 दिन में निराकरण का प्रावधान, फिर 64 दिन बाद आवेदक को सूचना क्यों? प्रथम अपील की सुनवाई 22 सितंबर को, उससे पहले ही जारी कर दिया शुल्क संबंधी पत्र
विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा कलेक्ट्रेट कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदनों के निराकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आवेदक द्वारा 13 जुलाई 2026 को प्रस्तुत आरटीआई आवेदन के जवाब में लोक सूचना अधिकारी कार्यालय ने 15 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर 97 पृष्ठों की जानकारी के लिए 194 रुपये चालान से शुल्क जमा करने की सूचना दी है। जबकि नकद भी जमा कराने का प्रावधान है।
आवेदन के करीब 64 दिन बाद शुल्क जमा करने का पत्र जारी किया गया।
आरटीआई के तहत सामान्यतः 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराने अथवा नियमानुसार जवाब देने का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि जानकारी तैयार थी और उसके लिए शुल्क लिया जाना था, तो आवेदक को समय सीमा के भीतर शुल्क जमा करने की सूचना क्यों नहीं दी गई? क्या कलेक्ट्रेट कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम की समय सीमा और प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा है?
प्रथम अपील लंबित, फिर शुल्क की सूचना क्यों?
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आवेदक इस प्रकरण में अपर कलेक्टर के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत कर चुका है। प्रथम अपील की सुनवाई 22 सितंबर 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद लोक सूचना अधिकारी कार्यालय द्वारा 15 सितंबर को शुल्क जमा करने संबंधी पत्र जारी किया गया है।
अब सवाल यह है कि जब आवेदक प्रथम अपील के माध्यम से सूचना के अधिकार के तहत अपने आवेदन के निराकरण की मांग कर चुका है और सुनवाई की तारीख भी तय हो चुकी है, तब कलेक्ट्रेट कार्यालय द्वारा जारी किया गया यह पत्र किस प्रक्रिया के तहत है? क्या प्रथम अपील की सुनवाई से पहले ही मूल आवेदन का निराकरण किया जा रहा है या फिर यह महज शुल्क जमा करने की औपचारिक सूचना है?
शुल्क की गणना और देरी पर भी सवाल
लोक सूचना अधिकारी द्वारा जारी पत्र में 97 पृष्ठों की जानकारी के लिए 2 रुपये प्रति पृष्ठ के हिसाब से कुल 194 रुपये शुल्क जमा करने को कहा गया है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि शुल्क सूचना के अधिकार मद 0070 के अंतर्गत चालान के माध्यम से जमा कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
हालांकि, आवेदक का सवाल यह है कि शुल्क की सूचना यदि समय पर दी जाती तो वह निर्धारित राशि जमा कर जानकारी प्राप्त कर सकता था। लेकिन सवा दो महीने बाद शुल्क जमा करने का पत्र जारी होने से सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी हो गई है।
क्या होगी जिम्मेदारी तय?
आरटीआई आवेदन के निराकरण में हुई देरी और प्रथम अपील की सुनवाई से ठीक पहले जारी किए गए शुल्क संबंधी पत्र ने कलेक्ट्रेट कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि 22 सितंबर को अपर कलेक्टर के समक्ष होने वाली प्रथम अपील की सुनवाई में इस देरी और शुल्क संबंधी प्रक्रिया पर क्या स्थिति स्पष्ट होती है तथा आवेदक को मांगी गई जानकारी कब तक उपलब्ध कराई जाती है।
आवेदक का कहना है कि सूचना का अधिकार आम नागरिक को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का कानूनी माध्यम देता है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में ही यदि निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा का पालन नहीं होगा, तो आम नागरिक अपने अधिकारों का उपयोग कैसे कर पाएगा?