ग्रामीण एवं आदिवासी अंचल के लिए गौरव का क्षण
विदिशा, एमपी धमाका
जिले के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचल में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने से अब स्थानीय युवा बड़े खेल मंचों तक पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में पौआ नाला निवासी आदिवासी छात्र इस्लोक आदिवासी का चयन आगामी BRICS पारंपरिक एवं स्वदेशी खेल आयोजन में मल्लखंब विधा के लिए किया गया है। चयन के बाद इस्लोक मल्लखंब में भाग लेने के लिए अहमदाबाद जाएंगे।
इस्लोक की यह उपलब्धि उनके परिवार और गांव के साथ-साथ पूरे विदिशा जिले के लिए गौरव का विषय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस आयोजन में भाग लेने वाले जिले के खिलाड़ियों में इस्लोक का चयन विशेष उपलब्धि है तथा वे इस स्तर के आयोजन में भाग लेने वाले क्षेत्र के पहले आदिवासी खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में भी खेल प्रतिभाओं की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं।
*पालन सेवा फाउंडेशन ने मल्लखंब से कराया परिचय*
इस्लोक की खेल यात्रा में पालन सेवा फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के साथ कार्य करते हुए उन्हें पारंपरिक भारतीय खेलों से परिचित कराने और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की पहल की गई। इसी पहल के माध्यम से इस्लोक को पहली बार मल्लखंब के बारे में जानकारी मिली और इस खेल का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला।
प्रशिक्षण के दौरान इस्लोक ने नियमित अभ्यास, अनुशासन और निरंतर मेहनत के माध्यम से मल्लखंब में अपनी क्षमता विकसित की। फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं को तैयार किया। उनके प्रदर्शन और प्रतिभा ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया और अब वे BRICS से जुड़े पारंपरिक एवं स्वदेशी खेल आयोजन में मल्लखंब विधा में भाग लेने जा रहे हैं।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को खेल प्रशिक्षण की सुविधाएं सीमित रूप से उपलब्ध होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण एवं उचित मंच उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। पालन सेवा फाउंडेशन की पहल इसी दिशा में बच्चों को अवसर प्रदान करने का माध्यम बनी।
*मल्लखंब ने दी नई पहचान*
मल्लखंब भारत की पारंपरिक खेल विधाओं में शामिल है। इसमें शारीरिक शक्ति, संतुलन, लचीलापन, एकाग्रता, साहस और शरीर पर नियंत्रण का विशेष महत्व होता है। इस्लोक ने ग्रामीण परिवेश में उपलब्ध अवसरों के बीच नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से इस खेल में अपनी पहचान बनाई।
पौआ नाला जैसे ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र से निकलकर BRICS के पारंपरिक एवं स्वदेशी खेल आयोजन से जुड़े मंच तक पहुंचना इस्लोक की खेल यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रही है।
इस उपलब्धि ने यह भी रेखांकित किया है कि यदि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को समय पर पहचान, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और उचित अवसर मिले, तो वे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर से आगे बड़े मंचों तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
*ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा*
इस्लोक के चयन से पौआ नाला और आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों और परिवारजनों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया है।
इस्लोक की उपलब्धि पारंपरिक भारतीय खेलों के प्रति ग्रामीण युवाओं में रुचि बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। मल्लखंब जैसे स्वदेशी खेलों के माध्यम से बच्चों को अपनी शारीरिक क्षमता विकसित करने के साथ-साथ भारतीय खेल परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलता है।
पौआ नाला की मिट्टी से निकलकर अहमदाबाद में आयोजित होने वाले BRICS पारंपरिक एवं स्वदेशी खेल आयोजन तक पहुंचने वाले इस्लोक आदिवासी की यात्रा ग्रामीण भारत की खेल प्रतिभा और अवसर मिलने पर उसकी संभावनाओं का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीण एवं आदिवासी युवाओं के लिए नई उम्मीद और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी है।
इस्लोक के चयन ने पौआ नाला के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। उनकी मेहनत, प्रशिक्षण और उपलब्धि आने वाले समय में क्षेत्र के अन्य बच्चों को भी पारंपरिक खेलों मेआगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।