नईगढ़ी की जिलहंडी पंचायत में व्यापक भ्रष्टाचार पर 68 लाख से अधिक की वसूली के आदेश
रीवा/मऊगंज, एमपी धमाका
बहुचर्चित ग्राम पंचायत जिलहंडी जनपद पंचायत नईगढ़ी मऊगंज में हुए व्यापक भ्रष्टाचार की परतें अब पूरी तरह से खुल चुकी हैं। दरअसल मामला बेहद रोचक और गंभीर है जहां भ्रष्टाचार की ऐसी कहानी गढ़ी गई की सुनकर होश उड़ जाएं। जिलहंडी पंचायत में सीसी सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, खेत तालाब निर्माण, आंगनवाड़ी भवन निर्माण सहित ग्रेवल सड़क निर्माण शौचालय निर्माण आदि कुल 28 से अधिक कार्यों में व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार किया गया जिसकी शिकायत जिलहंडी पंचायत निवासी सुधाकर सिंह, बंसपति द्विवेदी, देवेन्द्र बहादुर सिंह, जगदीश सिंह एवं अन्य ग्रामवासियों सहित सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा संयुक्त रूप से वर्ष 2021-22 से 2025 तक में की गई थी।
आरईएस एसडीओ एसआर प्रजापति की दो जांचों में वसूली राशि 68 लाख 43 हजार 836 रूपये
शिकायत के उपरांत सीईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा भ्रष्टाचार की जांच करवाई गई।जिसमें तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी उपसंभाग त्योंथर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एसआर प्रजापति द्वारा दो बार जांचे की गयीं जिसमें कुल वसूली राशि रूपये 68 लाख 43 हजार 836 दोनों जांचों में बनाई गयी. इस बीच प्रकरण जिला पंचायत रीवा में मप्र पंचायत राज अधिनियम 1993-94 की धारा 89 की सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया. सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष सरपंच सचिव इंजीनियर द्वारा कहा गया की जांच ठीक नहीं हुई है और कार्य मौके पर हुए हैं अतः पिछली जांचों से संतुष्ट नहीं होने से पुनः जाँच करवाई जाय. सीईओ जिला पंचायत कार्यालय में बाबुओं से लेनदेन कर अद्यतन प्रतिवेदन और नई जाँच पर जाँच के नाम पर सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े से पत्र जारी करवाया गया। जहाँ सीईओ जनपद पंचायत नईगढ़ी एवं सहायक यंत्री नईगढ़ी को पुनः जाँच कर जाँच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया।
निलंबित ईई टीपी गुर्द्वान की अगुआई में फर्जी जाँच टीम बनकर घटाई गयी वसूली राशि
इस बीच पुनः जनपद पंचायत नईगढ़ी में सांठगांठ करते हुए निलंबित एवं सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 रीवा टीपी गुर्दवान की अगुआई में एक 09 सदस्यीय फर्जी जांच टीम गठित की गयी जिसमे सीईओ जिला पंचायत के बिना ऐसे किसी आदेश के ही एक मनगढ़ंत टीम गठित कर कार्यालय में बैठकर एक फर्जी जाँच प्रतिवेदन तैयार किया गया जिसमे न तो शिकायतकर्ताओं को कोई जानकारी दी गयी और सभी आरोपी मिलकर संयुक्त रूप से तत्कालीन सरपंच पूनम सिंह एवं सुशीला साहू, सचिव सत्येन्द्र वर्मा एवं नवल किशोर जायसवाल, उपयंत्री प्रवीण पाण्डेय एवं सहायक यंत्री जगदीश राजपूत, उपयंत्री सुधाकर मिश्रा आदि द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्रक तैयार करते हुए जिला पंचायत रीवा को प्रस्तुत किया गया जहाँ पर एसडीओ प्रजापति की पिछली दो जांचों में आई वसूली राशि 68 लाख 43 हजार 836 को हटाकर मात्र 56 हज़ार 305 रूपये कर दिया गया और यह वसूली राशि बिना देर किये हुए सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े एवं धारा 40/92 के ओआईसी द्वारा जमा भी करवा दी गयी जिसकी किसी को कनोकान खबर तक नहीं हुई।
तत्कालीन सीईओ सौरभ सोनवणे के समक्ष उठा था ईई टीपी गुरद्वान की फर्जी जाँच का मामला
इस प्रकार 68 लाख से घटाकर वसूली राशि 56 हजार करने का मामला तत्कालीन सीईओ जिला पंचायत रीवा सौरभ सोनवणे के समक्ष भी उठाया गया. तब सौरभ सोनवणे ने एक चौथी जाँच टीम गठित कर दी जिसमें कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 02 एसबी रावत, परियोजना अधिकारी मनरेगा शिव सोनी एवं जिला परियोजना अधिकारी संजय सिंह को जाँच टीम रखा गया. इस चौथी जाँच टीम द्वारा स्थल का जाकर भौतिक निरीक्षण भी किया गया और अपना पंचनामा भी बनाया गया. जाँच के दौरान शिकायतकर्ताओं के साथ ग्रामवासी एवं अन्य पंचायत अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
चौथी जाँच में ईई एसबी रावत ने 68 लाख 43 हजार 836 वसूली को रखा यथावत
चौथी जाँच रिपोर्ट के मुखिया कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 02 एसबी रावत ने पंचायत एवं जनपद को अभिलेख उपलब्ध कराये जाने के लिए कई बार पत्राचार किये और मौखिक रूप से भौतिक परीक्षण के दौरान भी निर्देशित किया लेकिन मात्र आधे अधूरे अभिलेख उपलब्ध कराये गए. जिसके आधार पर ईई एसबी रावत ने अपना अभिमत सह जाँच प्रतिवेदन सौंप दिया जिसमें एसडीओ आरईएस एसआर प्रजापति की प्रारंभिक दो जांचों को सही बताया एवं प्रजापति द्वारा बनाई गयी वसूली राशि 68 लाख 43 हजार 836 रूपये को यथावत रखा गया। गौरतलब है की इस जाँच प्रतिवेदन में दो अन्य जाँच अधिकारियों ने अपना हस्ताक्षर नहीं किया. इस विषय पर शिकायतकर्ताओं का आरोप है की शिव सोनी मनरेगा एवं संजय सिंह डीएमएफ शाखा जिला पंचायत आरोपी पक्ष से मिले थे इसलिए ऐसा किया गया और हस्ताक्षर नहीं किये. हालांकि यह दोनो ही तकनीकी कार्यों में गैर तकनीकी अधिकारी थे।
चार जांचों के बाद भी धारा 92 का वसूली आदेश न होने से हाईकोर्ट की लेनी पड़ी शरण
मामले के मार्गदर्शक एवं सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा बताया गया कि जिलहंडी पंचायत नईगढ़ी की जाँच को लेकर कार्यवाही वास्ते कई बार तत्कालीन सीईओ जिला पंचायत सौरभ सोनवणे से गुजारिस की गयी, लेकिन राजनितिक दबाब एवं सांठगांठ के चलते कार्यवाही आगे नहीं बढ़ रही थी. इस बीच वर्ष 2023-24 के दौरान संभाग आयुक्त रीवा एवं मऊगंज कलेक्टर को भी शिकायत दी गयी और वसूली कराये जाने के साथ एफआईआर के लिए आग्रह किया गया. वर्षों बाद भी कार्यवाही न होने की स्थिति में शिकायतकर्ताओं द्वारा हाईकोर्ट जबलपुर की शरण ली गयी जहाँ भ्रष्टाचार पर कार्यवाही एवं वसूली को लेकर याचिका दायर की गयी।
अधिवक्ता स्वप्निल सोहगौरा द्वारा हाईकोर्ट में मामले पर की गयी पैरवी
हाईकोर्ट जबलपुर में मामले की पैरवी अधिवक्ता स्वप्निल सोहगौरा द्वारा की गई जहाँ उन्होंने याचिकाकर्ताओं सुधाकर सिंह एवं बंसपति द्विवेदी की याचिका दायर की. श्री सोहगौरा द्वारा पैरवी करते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका क्रमांक डब्लूपी/5957/2025 एवं अवमानना याचिका सीओएनसी/5946/2025 लगाई गयी. रिट याचिका क्रमांक डब्लूपी/5957/2025 में मऊगंज कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी ने 90 दिवस के भीतर धारा 89 की सुनवाई करते हुए निर्णय पारित किये जाने का आदेश दिया. इस बीच मामले की सुनवाई कई महीने तक चली जहाँ मऊगंज कलेक्टर न्यायालय द्वारा सभी पक्ष विपक्ष वादी प्रतिवादी को तलब किया गया जहाँ सभी के कथन बयान लिए गए. मामले की अंतिम तिथि 03 जुलाई 2025 थी जब तक कलेक्टर मऊगंज को अपना अंतिम निर्णय पारित करना चाहिए था लेकिन सुनवाई पूरी होने के बाद भी फाइल को कलेक्ट्रेट में दबाकर रख दिया गया और कोई निर्णय नहीं दिया जा रहा था. इसके बिषय में शिकायतकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं द्वारा कलेक्टर मऊगंज को सितम्बर/अक्तूबर 2025 में पत्र लिखकर सूचना भी दी गयी की यदि सुनवाई पर जल्दी निर्णय नहीं लिया जाता तो हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी. विहित प्राधिकारी एवं कलेक्टर मऊगंज श्री संजय कुमार जैन द्वारा अनिर्णय की स्थिति में एक बार पुनः हाईकोर्ट जबलपुर में अवमानना याचिका क्रमांक सीओएनसी/5946/2025 दायर की गयी जिसमें दिनांक 14.10.2025 जस्टिस द्वारिकाधीश बंसल द्वारा कलेक्टर मऊगंज संजय कुमार जैन एवं सीईओ जिला पंचायत रीवा मेहताब सिंह गुर्जर को आदेशित किया गया की 01 दिसम्बर 2025 तक वह अवमानना याचिका का जवाब प्रस्तुत करें की क्यों हाईकोर्ट की दी गयी समयसीमा 90 दिवस के भीतर सुनवाई पूर्ण कर आदेश नहीं दिया।
हाईकोर्ट की अवमानना याचिका क्रमांक सीओएनसी/5946/2025 के बाद बढ़ी खलबली
हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा आदेशित अवमानना याचिका क्रमांक सीओएनसी/5946/2025 को एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी एवं बंसपति प्रसाद द्विवेदी द्वारा दिनांक 17.10.2025 को जिला कलेक्टर कार्यालय मऊगंज में रिसीव करवा दिया जाकर पावती प्राप्त की गयी. मामले की प्रति मऊगंज के संयुक्त कलेक्टर एपी द्विवेदी एवं एडीएम पीके पाण्डेय को भी उपलब्ध करवा दी गयी. एक प्रति सीईओ जिला पंचायत रीवा एवं कमिश्नर रीवा संभाग को भी उपलब्ध करवाई जाकर जल्द कारवाही की माग की गई. हाईकोर्ट की अवमानना याचिका का आदेश पहुचते ही मऊगंज कलेक्टर कार्यालय में खलबली मच गयी. अब यह चर्चा आम हो गयी की हाईकोर्ट को अवमानना का जबाब देना पड़ेगा।
अवमानना के डर से आनन फानन में 22 अक्तूबर 2025 को जारी हुआ धारा 89 का आदेश
अवमानना याचिका क्रमांक सीओएनसी/5946/2025 पहुचते ही कलेक्टर कार्यालय मऊगंज एवं सीईओ जिला पंचायत कार्यालय रीवा में उथल पुथल मच गयी. आखिर 68 लाख से अधिक के भ्रष्टाचार एवं वसूली पर कार्यवाही का मामला जो ठहरा जिसमें पंचायत से लेकर जनपद एवं जिला स्तर तक के अधिकारियों कर्मचारियों की संलिप्तता प्रमाणित हो चुकी थी. इस बीच प्राप्त जानकारी अनुसार तीन चार दिनों की लगातार बैठक और माथापच्ची के बाद कलेक्टर मऊगंज द्वारा 22 पन्ने का विस्तृत आदेश जारी किया गया जहाँ 06 दोषियों को चिन्हित किया गया और एसडीओ आरईएस एसआर प्रजापति एवं ईई एसबी रावत के जाँच प्रतिवेदन को ही मान्य किया जाकर धारा 89 एवं 92 का वसूली आदेश जारी किया गया।
6 दोषियों के विरुद्ध बनाई गयी 68 लाख 43 हजार 836 रूपये की वसूली
हाईकोर्ट जबलपुर की अवमानना याचिका क्रमांक 5946/2025 के आने के बाद दिनांक 22 अक्तूबर 2025 को कलेक्टर मऊगंज द्वारा एसडीओ एसआर प्रजापति एवं ईई ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 02 एसबी रावत द्वारा बनाई गयी वसूली राशि रूपये 68 लाख 43 हजार 836 रूपये को यथावत रखते हुए चिन्हि किये गए 06 आरोपियों के विरुद्ध वसूली बनाई गयी. इसमें तत्कालीन सरपंच ग्राम पंचायत जिलहंडी श्रीमती पूनम सिंह पति धर्मेन्द्र सिंह के विरुद्ध 22 लाख 57 हजार 483 रूपये, तत्कालीन सचिव ग्राम पंचायत जिलहंडी सत्येन्द्र वर्मा के विरुद्ध राशि रूपये 14 लाख 59 हजार 378, तत्कालीन सचिव ग्राम पंचायत जिलहंडी नवल किशोर जायसवाल के विरुद्ध वसूली राशि रूपये 7 लाख 98 हजार 112, तत्कालीन उपयंत्री जनपद पंचायत नईगढ़ी प्रवीण पाण्डेय के विरुद्ध वसूली राशि रूपये 14 लाख 92 हजार 120 रूपये, तत्कालीन सहायक यंत्री जनपद पंचायत नईगढ़ी जगदीश राजपूत के विरुद्ध वसूली राशि रूपये 08 लाख 08 हजार 337 रूपये, एवं तत्कालीन सरपंच ग्राम पंचायत जिलहंडी श्रीमती सुशीला साहू के विरुद्ध वसूली राशि रूपये 28,416 रूपये बनाई जाकर अनुशासनात्मक/दंडात्मक कार्यवाही के लिए सीईओ जिला पंचायत रीवा को आदेश अग्रेषित कर दिया गया।