• ग्रहों की वास्तविक शक्ति को समझना:
लग्न कुंडली में जो ग्रह कमजोर या नीच स्थिति में दिखते हैं, वे नवांश में उच्च स्थिति में होकर मजबूत बन सकते हैं। इसी तरह, लग्न कुंडली में उच्च ग्रह नवांश में नीच होकर कमजोर पड़ सकते हैं। नवांश कुंडली ग्रहों की असली शक्ति और क्षमता को दर्शाती है।
• वैवाहिक जीवन का विश्लेषण:
विवाह और जीवनसाथी से जुड़े मामलों का विश्लेषण करने के लिए नवांश कुंडली बहुत महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि विवाह के बाद व्यक्ति का स्वभाव, सोचने का तरीका और उसके जीवन में सुख कैसा रहेगा।
• व्यक्ति के आंतरिक गुणों का अध्ययन:
लग्न कुंडली जहां व्यक्ति के बाहरी पहलुओं को दिखाती है, वहीं नवांश कुंडली व्यक्ति के आंतरिक पहलुओं, जैसे स्वभाव, गुण-दोष और प्रवृत्तियों का गहन विश्लेषण करती है।
• भाग्य और कर्मफल का ज्ञान:
नवांश कुंडली व्यक्ति के भाग्य (भाग्य का भाग्य) और उसके कर्मों के फल का भी विश्लेषण करती है।
• जीवन के उत्तरार्ध का निर्धारण:
नवमांश कुंडली लग्न कुंडली के बाद के जीवन के परिणामों को दर्शाती है, खासकर विवाह योग्य आयु के बाद के जीवन को जानने में यह सहायक होती है।
• वर्गोत्तम स्थिति:
यदि जन्म कुंडली और नवमांश कुंडली में ग्रह एक ही राशि में हों, तो इसे वर्गोत्तम स्थिति कहा जाता है, जो व्यक्ति के लिए शुभ मानी जाती है.
संक्षेप में, लग्न कुंडली और नवांश कुंडली का संयुक्त अध्ययन ही व्यक्ति के जीवन के बारे में एक व्यापक और पूर्ण समझ प्रदान करता है।
ज्योतिष आचार्य वास्तु विशेषज्ञ
हस्तरेखा विद एवं टैरोट कार्ड रीडर
सुश्री प्रीतांजलि पाराशर
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नोट: फोन पर अपॉइंटमेंट लेने के बाद ही संपर्क कीजिए निश्चित समय पर आपका कार्य विश्लेषण होगा। अधिक जानकारी के लिए आप आचार्य को गूगल पर सर्च कर सकते हैं।
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