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कलेक्टर और एसपी हैं प्रशासनिक ढांचे के दो पहिया.. इनमें तालमेल हो बहुत बढ़िया..!

आनंद कुमार शर्मा, पूर्व आईएएस 

किसी भी जिले में कलेक्टर और एसपी के पद बड़े महत्वपूर्ण होते हैं , दोनों प्रशासनिक ढांचे के दो पहिये जैसे हैं , जरा सा तालमेल बिगड़ें तो जिले में व्यवस्था प्रभावित हुए बिना नहीं रहती। कुछ जिलों की तो ये भी दास्तान रही है कि दोनों के बीच तालमेल बिगड़ने के बाद अबोला हो गया । मेरे प्रमुख सचिव रहे मुक्तेश वार्ष्णेय एक बार रायसेन जिले की याद करके बता रहे थे , कि कलेक्टर और एसपी के मध्य ऐसा अबोला था कि वे दोनों के मध्य अनुवादक की तरह काम करते थे । विदिशा जिले में जब मैं पदस्थ हुआ तो वहाँ भी पुराने जमाने के कलेक्टर और एसपी के मध्य टकराव के किस्से तब भी लोग याद किया करते थे । 
                मेरा सौभाग्य था कि जिलों में मुझे ऐसे एसपी मिले जो न केवल बड़े कुशल अधिकारी थे बल्कि आपसी सामंजस्य के मामले में बड़े व्यवहार कुशल थे । जब मैं विदिशा में कलेक्टर था तो एक दिन सुबह सुबह एक सम्प्रदाय विशेष के लोग बंगले में पधारे । उनके आने की खबर सुन कर मैंने एहतियातन एसपी साहब को मोबाइल लगा कर बँगले में आने का अनुरोध किया और स्थानीय एसडीएम व तहसीलदार को बुलाने के लिए गार्ड को कहा और फिर ऑफिस में आकर बंगले में खड़े लोगों को बुलाकर बैठाया और उनके इस तरह आने का कारण पूछा । उनमें से एक बुजुर्ग सज्जन ने कहा कि पुलिस लाइन में साफ़सफ़ाई का काम चल रहा है , और इस बीच लाइन से लगे हुए हिस्से में मौजूद उनके धर्मस्थल को हटाने के लिए जेसीबी मशीन लगा दी गई है , शायद वहाँ कोई ऑफिस बनाने की योजना है , इससे समाज के लोगों में बड़ा रोष व्याप्त है ।  एसपी साहब तब तक आ चुके थे , उन्होंने कहा “पुलिस लाइन के बीच इन लोगों ने अवैध रूप से कुछ बना लिया होगा इसलिए आरआई साहब कार्यवाही कर रहे होंगे “। मैंने उनसे कहा अभी तो आप उन्हें रोक दीजिये, मामला जमीन का है तो तहसीलदार साहब से रिपोर्ट बुला लेते हैं , फिर देखेंगे । वे सहमत हो गए , और मिलने आयी भीड़ रुख़्सत हुई । शाम तक मेरे पास रिपोर्ट आ गई कि पुलिस लाइन को आबंटित भूमि में वो वादग्रस्त हिस्सा शामिल नहीं है , और संरचना पुलिस लाइन बनने से पहले की है । शाम को पूर्व से तय कार्यक्रम अनुसार मैं और एसपी साहब साथ बैठे , मैंने उन्हें स्थिति बतायी तो वे कुछ असहज हुए और बोले , इन लोगों ने डीआईजी साहब को कुछ और ही बता दिया है , अब मेरी वे मानेंगी नहीं , उनको तो आप ही समझाओ । संयोग से मैं डीआईजी मैडम से पूर्व परिचित था सो मैंने झट उन्हें फ़ोन लगाया और कहा आज के मामले में मेरा अनुरोध है कि मैं आपको रेवन्यू रिकॉर्ड भेज रहा हूँ आप एक बार कागज़ देख लें फिर जैसा कहेंगी वैसा कर लेंगे । दूसरे दिन सुबह ही मेरे पास मैडम का फ़ोन आ गया और उन्होंने कहा शासकीय निर्माण में कोई कंट्रोवर्सी करना ठीक नहीं है , मैं एसपी को कह देती हूँ थोड़ी जगह छोड़ कर निर्माण कर लेंगे । 
                     इसी तरह राजगढ़ में जब मैं कलेक्टर था तो एक दिन खबर मिली कि नवोदय स्कूल में खाने में कुछ खराबी हो जाने से बच्चों को उल्टी दस्त की शिकायत हुई है और कई बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं । चूँकि छोटे बच्चों का मामला था अतः मैं और एसपी साहब तुरन्त स्कूल और अस्पताल दोनों जगह पहुँचे और पाया कि ईशकृपा से कोई अनहोनी ना हुई थी , बल्कि भर्ती हुए बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार था । प्रारंभिक पूछताछ में पता लगा कि मेस के इंचार्ज ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती थी । बहरहाल मैंने एसडीएम साहब को पूरी जाँच कर रिपोर्ट देने को कहा और हम वापस आ गए । दूसरे दिन सुबह सुबह नवोदय स्कूल की प्रिंसिपल कलेक्टर बंगले में आ पहुँचीं । मुझे ख़बर मिली तो मैंने उन्हें बँगला ऑफिस में बैठाने को कहा और तैयार होकर उन्हें अपने सामने बुला भेजा । सामने आते ही वे रो पड़ीं और मुझसे कहने लगीं कि मेरे ख़िलाफ़ तो एफआईआर की जाकर मुझे गिरफ्तार करने की तैयारी हो रही है , मैं अब क्या करूँ । मैं हैरान हुआ , मुझे आभास हुआ कि कल एसपी साहब कुछ ज़्यादा ही भावुक हो रहे थे कहीं ये उसकी परिणीति ना हो । मैंने एसपी साहब को फ़ोन लगाया और उन्हें बताया कि प्रिंसिपल मेरे समक्ष बैठी हैं और इन्हें किसी ने ऐसी ख़बर दी है । एसपी साहब कहने लगे , जी हाँ सर इन लोगों की लापरवाही से बच्चों की जान जाते जाते बची है , इनपर दण्डिक कार्यवाहीं तो होनी ही चाहिए । मैंने कहा एसपी साहब ये कल ही की तो घटना है और प्रिंसिपल का इसमें क्या दोष ? एसपी साहब कुछ ज़्यादा ही उद्वेलित थे , कहने लगे सर वे ही तो ओवरऑल इंचार्ज हैं । मैंने शांत स्वरों में कहा तब तो आपको मेरे ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर करनी चाहिये क्योंकि स्कूल का अध्यक्ष तो मैं ही हूँ । वे थोड़ा सम्हले , और कहने लगे ये आप क्या कह रहे हैं ? मैंने आगे कहा , अभी कुछ भी करना जल्दबाजी होगी , जाँच हो जाने दें , वैसे भी ये सब शासकीय कर्मीं हैं , यदि ये पाया जाएगा कि लापरवाही आपराधिक किस्म की है तो मैं ही एफआईआर लिखाऊँगा । एसपी साहब भी शांत हुए और कहा ठीक है साहब अभी एफआईआर हुई नहीं है , जाँच रिपोर्ट आने तक हम रुकते हैं । इन सब बातों को सुन रहीं प्रिंसिपल साहिबा बड़ीं भावुक हो गईं थीं । उन्होंने हाथ जोड़ कर मुझे धन्यवाद दिया और विदा हो गईं।

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