राधे-राधे,
आप सब भी बोलेंगे,"राधे-राधे" क्योंकि,"राधे-राधे बोलो चले आएंगे बिहारी"।
आज के युग में बिहारी यानि श्रीकृष्ण को फिर से आने की आवश्यकता है। बिहारी आ गये हैं, श्री मनोज मुंतशिर के एक अप्रतिम, अद्भुत, ह्रदयस्पर्शी, नृत्य-संगीत से परिपूर्ण, "कृष्ण - राधा से रणभूमि तक" की क़िस्सागोई की प्रस्तुति के माध्यम से। इस क़िस्सागोई का अभिप्राय सिर्फ़ मनोरंजन नही, बल्कि कृष्ण के जीवन के गहन मानवीय अनुभवों, भावनाओं, संघर्षों और जीवन के गहरे सत्य से आपका परिचय कराना भी है। यह केवल एक मंच प्रदर्शन ही नहीं बल्कि एक दिव्य अनुभूति है।
इस प्रस्तुति में राधा, गांधारी, द्रौपदी और रुक्मणी के प्रसंगों को समसामयिक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है।
मनोज आज की युवा पीढ़ी से कहते हैं,"कृष्ण का हाथ पकड़कर चलिए,अर्थात उनके बताए रास्ते पर चलिए, जीवन में किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी"। ये प्रस्तुति आज के जटिल जीवन में परिवर्तन ला सकता है।
मानवता के पाठ के बारे में मनोज पूरे विश्व को श्रीकृष्ण की उस पंक्ति की याद दिलाते हैं," जो शांति के पक्ष में नहीं है वो मानवता के पक्ष में नहीं है"।
यह प्रस्तुति मनोज के अप्रतिम छंदबद्ध शब्दों में पिरोये गये श्रीकृष्ण भक्ति और जीवन स्थिरता का एक प्रतिबिंब है।
इस क़िस्सागोई को देख सुनकर आपको श्रीकृष्ण के दर्शन होते हैं।
आओ युवा भारत तुम्हारे बिहारी बुला रहे हैं।
राकेश श्रीवास्तवा