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जमकर भ्रष्टाचार में डूबा स्वास्थ्य विभाग, गड़बड़ियों पर पर्दा डाल रहा कलेक्ट्रेट..!


नियमों के विरुद्ध अपील लौटाई लोक सूचना अधिकारी ने

विदिशा, एमपी धमाका
जिले के स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं और कार्रवाई में लापरवाही को लेकर एक नया मामला सामने आया है। एसएस पैथोलॉजी लैब के खिलाफ की गई शिकायत पर जानकारी मांगने के बाद अब कलेक्ट्रेट कार्यालय की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। क्योंकि सीएमएचओ कार्यालय की गंभीर शिकायतों की जांच से जिला प्रशासन आज तक पर्दा नहीं उठा सका है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कलेक्टर कार्यालय विदिशा से यह जानकारी मांगी थी कि बिना प्रोटोकॉल पालन किए मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली लैब पर क्या कार्रवाई की गई। साथ ही शिकायत की प्रगति रिपोर्ट, संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियां, जांच रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई थी।
जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं होने पर आवेदक ने प्रथम अपील प्रस्तुत की। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कलेक्ट्रेट स्थित लोक सूचना अधिकारी कार्यालय ने अपील पर सुनवाई कराने के बजाय यह कहते हुए आवेदन वापस लौटा दिया कि आवेदन “गलत कार्यालय” में प्रस्तुत किया गया है।
आरटीआई जानकारों का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम में ऐसी स्थिति में आवेदन अथवा अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी अपर कलेक्टर के पास भेजना था, न कि उसे वापस लौटाने का। ऐसे में लोक सूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि संबंधित आवेदन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जुड़ा हुआ था, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की गड़बड़ियों को दबाने और कार्रवाई से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग पर पहले से ही कार्रवाई में ढिलाई और शिकायतों को दबाने के आरोप लगते रहे हैं। अब कलेक्ट्रेट द्वारा अपील लौटाने के मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल आरटीआई कानून की भावना के विपरीत माना जाएगा, बल्कि आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के अधिकार से वंचित करने जैसा भी होगा।
एमपी धमाका ने इस पूरे मामले पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी जानने का प्रयास किया।

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