7 साल में नहीं हुई एक भी प्राइवेट क्लीनिक की जांच, झोलाछाप डॉक्टरों पर मेहरबानी?
विदिशा, एमपी धमाका
जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आयुष विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ताज़ा मामला अटारीखेड़ा में बुजुर्ग की मौत से जुड़ा है, जहां परिजनों ने आरोप लगाया कि पेट दर्द की शिकायत पर झोलाछाप द्वारा इंजेक्शन लगाने के बाद बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस जांच में जुटी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिले में वर्षों से संचालित हो रहे प्राइवेट क्लीनिकों की जांच क्यों नहीं हुई? जानकारी के अनुसार पिछले 7 वर्षों में जिला आयुष अधिकारी द्वारा एक भी निजी डॉक्टर के क्लीनिक, उसकी डिग्री, योग्यता प्रमाण पत्र और रजिस्ट्रेशन की गंभीर जांच नहीं की गई।
जबकि मध्य प्रदेश शासन, आयुष विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन तथा संचालनालय आयुष भोपाल से स्पष्ट निर्देश जारी हैं कि जिला आयुष अधिकारी अपने जिले में फर्जी, अयोग्य और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करें। इतना ही नहीं, जिला आयुष अधिकारियों को पदेन डिस्ट्रिक्ट ड्रग इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी भी दी गई है।
इसके बावजूद जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मान्यता इलाज और इंजेक्शन लगाने के मामलों की लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में दिखाई दे रहा है।
अटारीखेड़ा की घटना के बाद अब लोगों में भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई होती, तो शायद कई लोगों की जान बच सकती थी। आखिर इन झोलाछापों को संरक्षण कौन दे रहा है? और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
एक साल में कई संदिग्ध मौतें
सूत्रों के अनुसार जिले में पिछले एक वर्ष में कथित गलत इलाज और अवैध क्लीनिकों से जुड़े कई मामले सामने आए, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। एफआईआर और जांच की बातें तो हुईं, लेकिन नतीजे आज तक सामने नहीं आए।
जनता पूछ रही सवाल
क्या जिला आयुष अधिकारी आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं?
बिना जांच कैसे चल रहे हैं अवैध क्लीनिक?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई?
आखिर कब बंद होगा झोलाछाप डॉक्टरों का मौत का कारोबार?