विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा जिले में फर्जी वैद्य, मेडिकल स्टोर और शिकायतों को दबाने के आरोपों ने अब बड़ा प्रशासनिक रूप ले लिया है। कलेक्टर कार्यालय से जारी तीन अलग-अलग पत्रों ने जिला आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार नोटिस और स्पष्टीकरण मांगने के बाद अब मामला अधिकारियों की जवाबदेही और संभावित कार्रवाई तक पहुंच गया है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, पत्रकार दीपक तिवारी द्वारा मेडिकल स्टोर एवं कथित फर्जी वैद्य के खिलाफ शिकायत की गई थी। आरोप था कि जिला आयुष अधिकारी डॉक्टर दिनेश अहिरवार द्वारा शिकायत को नियमों के विपरीत “खानापूर्ति” कर बंद कर दिया गया।
इसके बाद कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने जिला आयुष अधिकारी से जवाब-तलब शुरू किया।
पहला नोटिस: “तथ्य छिपाने” और लापरवाही के आरोप
16 जनवरी 2026 को जारी कारण बताओ सूचना पत्र में जिला आयुष अधिकारी पर गंभीर टिप्पणियां की गईं। पत्र में कहा गया कि जांच प्रतिवेदन में साक्ष्यों के अभाव, दस्तावेजों की कमी और संबंधित वैद्य की उपलब्धता नहीं होने का हवाला देकर शिकायत बंद करने का उल्लेख किया गया, जबकि बाद में प्रस्तुत रिपोर्ट में अलग स्थिति सामने आई।
पत्र में साफ कहा गया कि अधिकारी द्वारा शिकायत पत्र में वर्णित तथ्यों की गंभीरता से जांच नहीं की गई और अपूर्ण/भ्रामक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर ने इसे पदेन कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता माना।
दूसरा पत्र: “स्वयं करनी चाहिए थी जांच”
15 अप्रैल 2026 को जिला सतर्कता अधिकारी द्वारा जारी पत्र में जिला आयुष अधिकारी से चार बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा गया। पत्र में कहा गया कि यदि जांच सौंपी गई थी तो अधिकारी को स्वयं निरीक्षण करना चाहिए था, न कि किसी समिति के भरोसे रहना चाहिए था। साथ ही सवाल उठाया गया कि:
बिना बिल और डॉक्टर के पर्चे दवाइयां बेचने पर मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
कथित फर्जी वैद्य के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
तीसरा पत्र: “अपूर्ण और भ्रामक जानकारी”
10 जून 2026 को जारी तीसरे पत्र में कलेक्टर कार्यालय ने जिला आयुष अधिकारी की रिपोर्ट को “अपूर्ण, अस्पष्ट एवं भ्रामक” बताया। पत्र में कहा गया कि जिले में पदस्थापना से अब तक किए गए निरीक्षण, परीक्षण रिपोर्ट और फर्जी वैद्यों के मामलों में की गई वैधानिक कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा 3 दिन में प्रस्तुत किया जाए।
यानी अब मामला सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले में फर्जी वैद्यों और विभागीय कार्रवाई की समीक्षा तक पहुंच गया है।
बड़ा सवाल
तीन-तीन पत्रों और लगातार सवालों के बाद भी क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज
लगातार नोटिसों से जिला आयुष विभाग में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कलेक्टर कार्यालय आगे क्या बड़ा कदम उठाता है।