बदहाल हुई वैत्रवती: प्रदूषण और उपेक्षा की शिकार
दीपक तिवारी
पद्म पुराण में कलियुग की “दूसरी गंगा” कही गई पवित्र वेत्रवती नदी (बेतवा) आज बदहाली और प्रदूषण की मार झेल रही है। जिस नदी को धर्मग्रंथों में मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली बताया गया है, उसी नदी का वर्तमान स्वरूप प्रशासनिक उपेक्षा और लोगों की लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर बयां कर रहा है।
विदिशा में बेतवा नदी का जलस्तर बेहद कम दिखाई दे रहा है, जबकि नदी किनारे गंदगी फैली हुई है। पत्थरों और सूखी जमीन के बीच सिमटती नदी यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर “दूसरी गंगा” कही जाने वाली वेत्रवती की सुध कौन लेगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्म पुराण के पृष्ठ 792 में भगवान शंकर ने माता पार्वती से कहा था कि वेत्रवती नदी के दर्शन से दुःख दूर होते हैं और इसके स्पर्श से मानसिक पापों का नाश होता है। लेकिन वर्तमान हालात में नदी स्वयं संरक्षण और शुद्धिकरण की प्रतीक्षा करती नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में लगातार बढ़ता प्रदूषण, अवैध कचरा फेंकना, जल संरक्षण की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण बेतवा का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। बरसात छोड़ दें तो कई स्थानों पर नदी केवल गंदे जलधाराओं और पत्थरों तक सीमित होकर रह गई है।
धार्मिक और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि बेतवा नदी को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। घाटों की नियमित सफाई, कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई और नदी संरक्षण के लिए जनजागरूकता जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी वेत्रवती की पवित्रता और गौरव को देख सकें।
पद्म पुराण में वर्णित वेत्रवती नदी की महिमा, बेतवा को बताया दूसरी गंगा
सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथ पद्म पुराण में वेत्रवती नदी (वर्तमान बेतवा) की महिमा का विशेष वर्णन किया गया है। पद्म पुराण के पृष्ठ 792 में भगवान शंकर द्वारा माता पार्वती को वेत्रवती नदी का महत्व बताते हुए कहा गया है कि कलियुग में यह नदी दूसरी गंगा के समान मानी गई है।
ग्रंथ में उल्लेख है कि जो लोग सुख, धन और स्वर्ग की इच्छा रखते हैं, उन्हें वेत्रवती नदी में स्नान करना चाहिए। इसमें स्नान करने से मनुष्य इस लोक में सुख भोगकर अंत में विष्णु के सनातन धाम को प्राप्त करता है।
वर्णन के अनुसार सूर्यवंश और सोमवंश के अनेक क्षत्रिय वेत्रवती नदी के तट पर आकर स्नान कर परम शांति को प्राप्त हुए। भगवान शंकर ने कहा कि इस नदी के दर्शन से दुःख दूर होते हैं तथा इसके स्पर्श से मानसिक पापों का नाश होता है।
पद्म पुराण में यह भी कहा गया है कि वेत्रवती नदी में स्नान, जप और हवन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वाराणसी में चांद्रायण व्रत करने से जो पुण्य मिलता है, वही पुण्य वेत्रवती में स्नान मात्र से प्राप्त हो जाता है।
ग्रंथ के अनुसार पृथ्वी के सभी तीर्थ, देवता और पितर वेत्रवती नदी में निवास करते हैं। भगवान शंकर ने माता पार्वती से कहा कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश, देवगण और महर्षि भी इस पवित्र नदी में विराजमान रहते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति प्रतिदिन एक, दो अथवा तीनों समय वेत्रवती नदी में स्नान करता है, वह निश्चित रूप से मुक्त हो जाता है।