विदिशा, एमपी धमाका
प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। विदिशा के सीएमएचओ कार्यालय में कथित अव्यवस्था एवं गड़बड़ियों की जांच पिछले डेढ़ साल से फाइलों में दबकर रह गई है।
ताजा मामला जिला कलेक्टर कार्यालय से जारी एक स्मरण-पत्र का है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को लंबित जांच प्रतिवेदन तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र के अनुसार पत्रकार दीपक तिवारी द्वारा 18 नवंबर 2024 को शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद अपर कलेक्टर स्तर से जांच के आदेश जारी हुए थे। इसके बावजूद आज तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
स्मरण-पत्र में संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और तत्कालीन जिला कोषालय अधिकारी को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा गया है कि पूर्व में भी आदेश और स्मरण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित जांच प्रतिवेदन अब तक लंबित है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन स्वयं जांच के आदेश दे चुका था, तो आखिर रिपोर्ट दबाए रखने के पीछे वजह क्या है? क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं?
प्रदेश सरकार लगातार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, लेकिन विदिशा में प्रशासनिक ढिलाई ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डेढ़ साल बाद भी जांच पूरी न होना, शासन की कार्यप्रणाली और “सुशासन” के दावों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।
अब देखना यह होगा कि यह स्मरण-पत्र भी सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाता है या फिर जिम्मेदारों पर वास्तव में कोई कार्रवाई होती है।