विदिशा, एमपी धमाका
जिला पंचायत विदिशा में सूचना के अधिकार (RTI) कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों को जानकारी देने के बजाय अधिकारी नियमों का ऐसा जाल बुन रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके। ताजा मामला प्रथम अपील क्रमांक 17/2026 से जुड़ा है, जिसमें आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी को “अस्पष्ट” बताकर मामला ही खत्म कर दिया गया।
दस्तावेज़ों के अनुसार आवेदक ने जिला पंचायत से योजनाओं और बैठकों से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय तकनीकी बहाने खड़े कर दिए। इतना ही नहीं, प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी बिना ठोस सुनवाई के लोक सूचना अधिकारी के पक्ष में आदेश पारित कर दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता के लिए बनाया गया है, तो फिर अधिकारी जानकारी देने से आखिर डर क्यों रहे हैं? क्या योजनाओं और बैठकों की जानकारी सार्वजनिक होने से बड़े घोटालों का खुलासा हो सकता है?
आदेश में यह तक लिखा गया कि आवेदक ने “योजना विशेष” और “बैठक” का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों का कर्तव्य था कि नागरिक को सहयोग कर सही जानकारी उपलब्ध कराते। इसके उलट पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि जिला पंचायत में लंबे समय से जानकारी छिपाने, फाइलें दबाने और नियमों का मनमाना उपयोग करने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि जिला पंचायत के कुछ अधिकारी पूरी तरह “Out of Control” हो चुके हैं।
RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सूचना मांगने वालों को इसी तरह परेशान किया जाता रहा, तो पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी और भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिलता रहेगा।