भोपाल, एमपी धमाका
सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत समय-सीमा में जानकारी न देना भोपाल के तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त कलेक्टर को महंगा पड़ गया। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी पर ₹25,000 का अधिकतम व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है।
मामला भोपाल के नजूल शहर वृत्त, जहांगीराबाद स्थित खसरा नंबर 999 की जमीन से जुड़ी जानकारी का है। भोपाल निवासी अरविंद शाक्य ने 27 जुलाई 2022 को आरटीआई आवेदन देकर संबंधित जानकारी मांगी थी। कानून के अनुसार आवेदक को 30 दिनों के भीतर जानकारी मिल जानी चाहिए थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते आवेदक को करीब तीन वर्षों तक जानकारी के लिए भटकना पड़ा।
जब मामला द्वितीय अपील के रूप में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग पहुंचा, तब मुख्य सूचना आयुक्त विजय यादव की पीठ ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से सुनवाई की। आयोग ने प्रारंभिक जांच के दौरान मामले से जुड़े छह अधिकारियों — आशुतोष शर्मा, एल.के. खरे, आदित्य जैन, जमील खान, अमन मिश्रा और इकबाल मोहम्मद — को कारण बताओ नोटिस जारी किए।
अंतिम सुनवाई में आयोग ने पाया कि सूचना देने में हुई देरी और जानकारी रोके रखने के लिए मुख्य रूप से तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त कलेक्टर जमील खान जिम्मेदार थे। अन्य अधिकारियों के स्पष्टीकरण संतोषजनक पाए जाने पर उन्हें राहत दे दी गई, जबकि जमील खान पर RTI अधिनियम की धारा 20(1) के तहत ₹25,000 का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया।
यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि जनता के सूचना के अधिकार की अनदेखी की जाएगी तो जवाबदेही तय होगी। सूचना का अधिकार अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि आम नागरिक को प्रशासन से जवाब मांगने का संवैधानिक माध्यम है, जिसके पालन में लापरवाही अब भारी पड़ सकती है।