सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा, प्रदेश के आठ जिलों में मिली गड़बड़ियां—विदिशा दूसरे स्थान पर..!
विदिशा, एमपी धमाका
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में विदिशा जिले का नाम गंभीर अनियमितताओं के साथ सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच जांची गई ग्राम पंचायतों में विदिशा जिले में 519 फर्जी, डुप्लीकेट एवं गलत जॉब कार्ड पाए गए, जिससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के आठ जिलों की 64 ग्राम पंचायतों में कुल 2,426 फर्जी जॉब कार्ड मिले, जिनके आधार पर 1.46 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान कर दिया गया। सबसे अधिक गड़बड़ी सागर (782) में मिली, जबकि विदिशा 519 जॉब कार्ड के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद मंडला (448) और बैतूल (228) का स्थान है।
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि फर्जी और डुप्लीकेट जॉब कार्ड योजना के संचालन में गंभीर लापरवाही का संकेत हैं। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा सबसे महत्वपूर्ण योजना मानी जाती है। ऐसे में विदिशा में सामने आई यह गड़बड़ी प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
एमपी धमाका सवाल उठाता है:
क्या विदिशा में फर्जी जॉब कार्ड बनाने वालों पर कार्रवाई होगी? क्या मजदूरी भुगतान की जांच कर दोषियों से राशि वसूली जाएगी, या मामला फाइलों में ही दब जाएगा?