60 मिनट से ज्यादा बैठक पर देना होगा ठोस कारण, कैबिनेट सचिव का बड़ा प्रशासनिक सुधार अभियान
"30 साल का अनुभव" या "एक साल का अनुभव 30 बार"—अधिकारियों से आत्ममंथन, समय प्रबंधन और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति अपनाने का आह्वान
नई दिल्ली, एमपी धमाका
सरकारी दफ्तरों में घंटों चलने वाली लंबी, निष्कर्षहीन और औपचारिक बैठकों का दौर अब बदलने वाला है। भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में सभी मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों को महत्वपूर्ण पत्र जारी करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि "मीटिंग कम, परिणाम ज्यादा" ही नई कार्यशैली का मूल मंत्र होना चाहिए।
जारी इस पत्र में अधिकारियों को सलाह दी गई है कि सामान्य परिस्थितियों में बैठकें 60 मिनट से अधिक न चलें। यदि किसी बैठक को अधिक समय तक चलाना आवश्यक हो, तो उसके लिए स्पष्ट और ठोस कारण होना चाहिए। उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि तय समय में प्रभावी निर्णय लेकर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है।
कैबिनेट सचिव ने पत्र में कहा कि लंबे समय तक सरकारी सेवा में रहने के कारण अधिकारी अक्सर अपनी पुरानी कार्यशैली और आदतों में बंध जाते हैं। ऐसे में आत्ममंथन, आत्ममूल्यांकन और कार्यशैली में निरंतर सुधार बेहद आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से स्वयं से प्रश्न करने का आग्रह किया कि क्या वे हर वर्ष अपने कार्य में कुछ नया और बेहतर जोड़ रहे हैं, या फिर केवल वर्षों पुरानी कार्यप्रणाली को दोहराते चले जा रहे हैं।
डॉ. सोमनाथन ने एक बेहद प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा कि यदि समय-समय पर आत्मविश्लेषण नहीं किया गया तो "30 वर्षों का अनुभव भी केवल एक वर्ष के अनुभव को 30 बार दोहराने" जैसा बन सकता है। इसलिए अनुभव तभी सार्थक है, जब उसके साथ सीखने और सुधार की प्रक्रिया भी लगातार चलती रहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़े बदलावों की अपेक्षा नहीं है, बल्कि छोटी-छोटी प्रशासनिक आदतों—जैसे बैठकों का संचालन, समय प्रबंधन, एजेंडा आधारित चर्चा, संवाद शैली, निर्णय लेने की गति और कार्य निष्पादन—में सुधार लाकर भी प्रशासनिक गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी जा सकती है।
पत्र के प्रमुख संदेश
सामान्य बैठकें 60 मिनट के भीतर पूरी हों।
बैठक का एजेंडा पहले से तय हो और समयबद्ध निर्णय लिए जाएं।
बेवजह लंबी चर्चाओं के बजाय परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति अपनाई जाए।
अधिकारी नियमित आत्ममंथन और आत्ममूल्यांकन करें।
हर वर्ष स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करें।
छोटी-छोटी कार्यशैली में बदलाव से कार्यक्षमता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूती मिलेगी।
सरकारी हलकों में इस पहल को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि इन सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो न केवल सरकारी कामकाज की गति बढ़ेगी, बल्कि अधिकारियों का समय अधिक उत्पादक कार्यों में लगेगा, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और जनता को बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिल सकेंगी।