शिकायतों का निराकरण नहीं, नियम विरुद्ध अपीलें लौटाने का आरोप... PIO पर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के अधिकारों में हस्तक्षेप का दावा, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा कलेक्टर कार्यालय में
शिकायतों का निराकरण न करने और वस्तुस्थिति जाऩने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर आवेदनों व प्रथम अपीलों के निराकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक आवेदक ने कलेक्टर विदिशा को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि अपीलों का समय पर निराकरण नहीं किया जा रहा है, बल्कि नियमों के विपरीत उन्हें वापस लौटाया जा रहा है।
शिकायत में दावा किया गया है कि आवेदक ने 11 नवंबर 2024 को की गई शिकायत में कार्रवाई न होने से आरटीआई और प्रथम अपील प्रस्तुत की थी, लेकिन कलेक्टर कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा नियमों के विरुद्ध अपील वापस कर दी गई।
आवेदक का आरोप है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रथम अपील पर निर्णय लेने का अधिकार केवल प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को है, जबकि इस मामले में लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा अपीलों के संबंध में कार्रवाई कर अपीलीय प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया गया। शिकायत में इसे नियमों के विपरीत बताते हुए गंभीर प्रशासनिक अनियमितता करार दिया गया है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित कार्यालय में दायर कई शिकायतों और आवेदनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आवेदक का कहना है कि उसने 17 मार्च 2026 को RTI आवेदन देकर पांच बिंदुओं पर जानकारी भी मांगी थी, लेकिन उससे जुड़े मामलों में भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि यदि इसी प्रकार प्रथम अपीलों को लौटाने की प्रक्रिया जारी रही तो आम नागरिक सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिले वैधानिक अधिकारों से वंचित हो जाएंगे और पारदर्शिता की व्यवस्था प्रभावित होगी।
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने तथा लंबित प्रथम अपीलों का विधिसम्मत निराकरण सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
एमपी धमाका की पड़ताल में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि कलेक्टर कार्यालय में आम नागरिकों द्वारा दी गई शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं की जाती। जब शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की प्रगति और कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम का सहारा लेते हैं, तब भी उन्हें नियमों के अनुरूप जानकारी मिलने के बजाय प्रक्रिया संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।