ढाई लाख रुपये खर्च, लेकिन जनता को नहीं मिला लाभ
विदिशा | एमपी धमाका
करीब डेढ़ साल पहले जिस नाली निर्माण को लेकर जिले की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हुआ था, आज भी उसी स्थान पर हालात जस के तस बने हुए हैं। सड़क पर नालियों का गंदा पानी भरा हुआ है और राहगीरों को कीचड़ व जलभराव के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
यह वही मामला है, जब जिला पंचायत अध्यक्ष गीता रघुवंशी ने सोठिया गांव से मेहंगांव बालाजी धाम तक पदयात्रा निकालकर सोठिया गांव में नाली निर्माण की मांग उठाई थी। मामला इतना गरमाया कि प्रशासन हरकत में आया और तत्काल नाली निर्माण कार्य शुरू कराया गया था।
बताया जाता है कि इस नाली निर्माण पर जनपद पंचायत द्वारा लगभग ढाई लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन डेढ़ साल बाद भी सड़क पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था हुई और न ही लोगों को समस्या से राहत मिली। बरसात में स्थिति और भी विकट हो जाती है तथा सड़क पर गंदा पानी भरने से आवागमन प्रभावित होता है।
अब सवाल यह है कि यदि ढाई लाख रुपये खर्च होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, तो जिम्मेदार कौन है? क्या निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई, या फिर सरकारी धन केवल कागजों में ही खर्च हो गया?
एमपी धमाका मांग करता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि निर्माण कार्य में अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।