विदिशा, एमपी धमाका
महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करने और ग्राम पंचायतों की तस्वीर बदलने के दावे करने वाले प्रशासन की हकीकत विदिशा जिला मुख्यालय स्थित जनपद पंचायत कार्यालय के बाहर ही सवालों के घेरे में नजर आती है।
कार्यालय के मुख्य मार्ग पर बारिश के बाद विशाल जलभराव और कीचड़ ने सड़क को तालाब में तब्दील कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, ग्रामीणों और कर्मचारियों को कार्यालय तक पहुंचने के लिए गड्ढों और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। यह दृश्य न केवल विकास के दावों की पोल खोलता है, बल्कि जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
विडंबना यह है कि जिस जनपद पंचायत कार्यालय से गांवों के विकास, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं की योजनाओं की निगरानी होती है, उसी कार्यालय का प्रवेश मार्ग बदहाल स्थिति में है। यदि जिला मुख्यालय पर स्थित कार्यालय की यह दशा है, तो ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जाती। ऐसे में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की अवधारणा और पंचायतों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के दावे केवल कागजी साबित होते दिखाई दे रहे हैं।
एमपी धमाका सवाल करता है:
जब विकास की योजनाओं का संचालन करने वाले कार्यालय का रास्ता ही बदहाल हो, तो गांवों के विकास के दावों पर जनता आखिर कैसे विश्वास करे?