जिला आपूर्ति अधिकारी बेधड़क कर रहे धारा-7 का उल्लंघन और अपीलीय अधिकारी के आदेशों की अवहेलना!
विदिशा, एमपी धमाका।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत नागरिकों को समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध कराना प्रत्येक लोक सूचना अधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी है। लेकिन विदिशा जिले में जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय पर लगातार आरटीआई कानून की अनदेखी और पारदर्शिता से बचने के आरोप लग रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदक द्वारा जिला स्तरीय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सतर्कता समिति की हुई बैठकों की मीटिंग रजिस्टर की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं। इसके लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
आरोप है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय द्वारा आरटीआई अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन किया जा चुका है तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों की भी अवहेलना की गई थी। इसके बावजूद विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
सूचना के अधिकार के जानकारों का कहना है कि आरटीआई कानून का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन यदि अधिकारी ही जानकारी देने से बचने लगें तो यह आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
प्रश्न यह उठता है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही कानून के प्रावधानों का पालन नहीं करेंगे, तो आम नागरिक अपने अधिकारों के लिए किसके पास जाएं?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सूचना का अधिकार नागरिकों को शासन में भागीदारी और निगरानी का अधिकार देता है। ऐसे में जानकारी रोकना केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता की भावना के विपरीत माना जा रहा है।