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कागजों में स्वच्छता, जमीन पर वीरानी... जीआरएस की चल रही मनमानी..!


जिला, जनपद सीईओ से लेकर विधायक तक सबको खबर.. लेकिन बंद पड़ा सामुदायिक स्वच्छता परिसर..!

विदिशा, एमपी धमाका
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त बनाने और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत की गई थी। लेकिन विदिशा जिले की ग्राम पंचायत करैया हवेली के रंगई गांव में इस महत्वाकांक्षी योजना की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है।
गांव में स्वीकृत सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण कार्य सात वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। भवन तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन आज तक उसमें पानी, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिसके कारण यह परिसर ग्रामीणों के उपयोग में नहीं आ पा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंच सका। परिसर के अधूरे रहने से ग्रामीणों को आज भी खुले में शौच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि इस सामुदायिक स्वच्छता परिसर के निर्माण के लिए जनपद पंचायत द्वारा करीब 3 लाख 44 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन वर्षों बाद भी यह भवन उपयोग के लिए तैयार नहीं हो पाया है। ग्रामीण अब इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सवाल कई, जवाब किसी के पास नहीं
सात साल बाद भी निर्माण कार्य अधूरा क्यों है?
निर्माण राशि खर्च होने के बावजूद परिसर चालू क्यों नहीं हुआ?
जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत जीआरएस पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या स्वच्छ भारत मिशन की मंशा कागजों तक ही सीमित रह जाएगी?
गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा कर परिसर को शुरू किया जाता, तो स्वच्छता अभियान को मजबूती मिलती और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो पातीं। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और समाधान पर टिकी हैं।

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