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ओलंपस हाई स्कूल में आरती, पूजन एवं सत्संग का भव्य आयोजन, विद्यार्थियों को दिए चरित्र निर्माण के सूत्र


हनुमानजी के संस्कार अपनाओ, भारत का गौरव बढ़ाओ: परम पूज्य रामायणी जी महाराज

विदिशा, एमपी धमाका।
सागर रोड स्थित ओलंपस हाई स्कूल में गुरुवार को परम पूज्य 1008 गुरुदेव महामंडलेश्वर श्री विशंभर दास जी रामायणी महाराज के पावन सान्निध्य में आरती, पूजन एवं सत्संग का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक शामिल हुए।
पूज्य गुरुदेव महाराज की आरती एवं पूजन विद्यालय संस्थापक यशपाल सिंह रघुवंशी, संचालक मोहित रघुवंशी, अकादमिक डायरेक्टर प्राची रघुवंशी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने विधिवत संपन्न कराया। इसके बाद आयोजित सत्संग में गुरुदेव महाराज ने विद्यार्थियों को जीवन निर्माण, संस्कार और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।

"विद्यार्थी ही भारत का भविष्य हैं"
अपने प्रेरक उद्बोधन में पूज्य गुरुदेव महाराज ने कहा कि विद्यार्थियों को भगवान हनुमानजी के आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए। हनुमानजी की भक्ति, अनुशासन, निष्ठा, विनम्रता और आत्मसंयम प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि आज के छात्र-छात्राएं ही कल के भारत का भविष्य हैं, इसलिए उनमें संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का भाव होना आवश्यक है।

स्वामी विवेकानंद से लें प्रेरणा
गुरुदेव महाराज ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने ज्ञान, व्यक्तित्व और आध्यात्मिक शक्ति से पूरी दुनिया में भारत की संस्कृति और सनातन परंपरा का गौरव बढ़ाया। विद्यार्थियों को भी ज्ञान, आत्मविश्वास और श्रेष्ठ संस्कारों के बल पर देश का नाम रोशन करने का संकल्प लेना चाहिए।

हनुमानजी का चरित्र आत्मसंयम का सर्वोच्च उदाहरण

प्रवचन के दौरान गुरुदेव महाराज ने भगवान हनुमान द्वारा माता सीता की खोज के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका के वैभव और आकर्षण के बीच भी उनका मन विचलित नहीं हुआ। यह उनके अटूट ब्रह्मचर्य, दृढ़ चरित्र और आत्मसंयम का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि मन पवित्र होगा तो शिक्षा सार्थक होगी और जीवन सफल बनेगा।

गुरु के प्रति श्रद्धा से मिलता है ज्ञान

उन्होंने हनुमानजी द्वारा सूर्यदेव से शिक्षा ग्रहण करने की कथा सुनाते हुए कहा कि ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, अनुशासन और श्रेष्ठ संस्कारों के साथ शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए, तभी वे परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों ने पूज्य गुरुदेव महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। विद्यालय परिवार ने उनका अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति का विशेष उत्साह देखने को मिला।


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