स्टोर रूम की चाबी निजी गाड़ी में होने पर जिला आयुष अधिकारी को लगाई फटकार..!
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत आयुष कमिश्नर के विदिशा दौरे में व्यवस्थाओं की खुली पोल
विदिशा, एमपी धमाका
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को विदिशा दौरे पर पहुंचीं आयुष विभाग की कमिश्नर उमा आर. माहेश्वरी ने आयुष औषधालय खमतला और खामखेड़ा का निरीक्षण करने के बाद जिला आयुष कार्यालय का भी जायजा लिया। कमिश्नर के दौरे को लेकर विभागीय स्तर पर व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद दिखाने की पूरी तैयारी नजर आई। चिकित्सक और स्टाफ निर्धारित ड्रेस में दिखाई दिए, वहीं परिसर की व्यवस्थाओं को भी निरीक्षण के लिहाज से दुरुस्त दिखाने की कवायद की गई।
हालांकि, जिला आयुष कार्यालय में निरीक्षण के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने विभागीय व्यवस्थाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए।
स्टोर रूम की चाबी ही मौके पर नहीं मिली!
कमिश्नर जब जिला आयुष कार्यालय के स्टोर रूम का निरीक्षण करने पहुंचीं तो उसकी चाबी मौके पर उपलब्ध नहीं थी। पूछताछ में बताया गया कि स्टोर रूम की चाबी जिला आयुष अधिकारी की स्वामी विवेकानंद चौराहे पर खड़ी निजी गाड़ी में रखी हुई है।
यह जवाब सुनकर कमिश्नर ने जिला आयुष अधिकारी डॉ दिनेश अहिरवार से सवाल किया कि सरकारी कार्यालय के महत्वपूर्ण स्टोर रूम की चाबी निजी वाहन में और वह भी कार्यालय से बाहर क्यों रखी गई है। मामले को लेकर कमिश्नर ने नाराजगी जताते हुए जिला आयुष अधिकारी को फटकार लगाई और कार्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल किए।
कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालय की महत्वपूर्ण चाबियां निर्धारित और सुरक्षित व्यवस्था के तहत उपलब्ध रहनी चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर निरीक्षण अथवा किसी जरूरी कार्रवाई में किसी तरह की बाधा न आए।
चूना डालकर छिपाई गई गंदगी?
दौरे को लेकर विभागीय तैयारियों का एक और पहलू भी चर्चा में रहा। निरीक्षण के दौरान जिला आयुष विंग परिसर और आसपास की गंदगी को लेकर कई जगह चूना डालकर व्यवस्थाएं बेहतर दिखाने की कवायद किए जाने की चर्चा रही। चिकित्सक और स्टाफ जहां निर्धारित ड्रेस में नजर आए, वहीं सवाल यह उठ रहा है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी के दौरे के समय ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त दिखाना ही मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का उद्देश्य है?
यदि आयुष संस्थानों में नियमित रूप से साफ-सफाई, स्टाफ की उपस्थिति और मरीजों को बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाती हैं, तो फिर वीआईपी निरीक्षण से पहले अलग से तैयारियां करने की जरूरत क्यों पड़ती है?
अभियान की भावना पर सवाल
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का उद्देश्य शासन की व्यवस्थाओं को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना और उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि निरीक्षण के दौरान वास्तविक स्थिति के बजाय व्यवस्थाओं को केवल औपचारिक रूप से बेहतर दिखाने की कोशिश हो, तो यह अभियान की मूल भावना पर सवाल खड़े करता है।
एक ओर जहां निरीक्षण से पहले “सब चकाचक” दिखाने की तैयारी नजर आई, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्टोर रूम की चाबी का निजी वाहन में मिलना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर गया।
अब सवाल यही है कि आयुष कमिश्नर के निरीक्षण के बाद विभागीय व्यवस्थाओं में वास्तविक सुधार होगा या फिर अगली वीआईपी विजिट तक एक बार फिर तैयारियां कर सब कुछ चकाचक दिखाने की कवायद दोहराई जाएगी?