पदस्थ दिनांक से अब तक के निरीक्षण, फर्जी वैद्यों पर कार्रवाई और दैनिक कार्यवाही का मांगा था पूरा ब्यौरा; 3 दिन में जवाब देने के आदेश के बावजूद दो महीने से टालमटोल..!
विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा जिला आयुष विभाग में कलेक्टर के आदेशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मेडिकल स्टोर्स एवं फर्जी वैद्यों के विरुद्ध की गई शिकायत के मामले में कलेक्टर कार्यालय द्वारा जिला आयुष अधिकारी से विस्तृत बिंदुवार प्रतिवेदन मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा निकलने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। करीब दो महीने बाद अब जिला सतर्कता अधिकारी को स्मरण-पत्र जारी कर जवाब मांगना पड़ा है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि कलेक्टर कार्यालय ने महज खानापूर्ति के लिए जवाब नहीं मांगा था, बल्कि जिला आयुष अधिकारी के पदस्थ दिनांक से लेकर आदेश जारी होने तक जिले में किए गए निरीक्षणों का पूरा विवरण, साथ ही फर्जी वैद्यों के विरुद्ध की गई कार्रवाई और प्रकरणों में की गई दैनिक कार्यवाही का विस्तृत ब्यौरा मांगा था।
कलेक्टर ने मांगी थी बिंदुवार और तथ्यात्मक जानकारी
कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक क्यू/सतर्कता/2026/9339 दिनांक 10 जून 2026 में जिला आयुष अधिकारी को निर्देशित किया गया था कि शिकायत से संबंधित मांगी गई जानकारी प्रस्तुत की जाए।
पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए कि जिले में पदस्थ दिनांक से लेकर पत्र जारी होने की तिथि तक किए गए निरीक्षणों की जानकारी, संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई तथा फर्जी वैद्यों के संबंध में की गई दैनिक कार्यवाही का विस्तृत ब्यौरा बिंदुवार एवं तथ्यात्मक रूप से उपलब्ध कराया जाए।
इतना ही नहीं, कलेक्टर कार्यालय ने यह जानकारी तीन दिवस में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
तीन दिन का आदेश, दो महीने बाद भी जवाब नहीं!
कलेक्टर कार्यालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद निर्धारित अवधि में प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 10 अगस्त 2026 को जिला सतर्कता अधिकारी द्वारा स्मरण-पत्र क्रमांक 13431 जारी किया गया।
स्मरण-पत्र में साफ उल्लेख किया गया है कि 10 जून को जारी पत्र के माध्यम से चाही गई जानकारी जिला आयुष अधिकारी द्वारा अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है, जबकि वह अपेक्षित थी।
स्मरण-पत्र में निर्देशित किया गया कि पूर्व पत्र का अवलोकन कर पत्रानुसार चाही गई जानकारी तत्काल कार्यालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
आखिर क्या छिपा है निरीक्षण और कार्रवाई के ब्यौरे में?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कलेक्टर कार्यालय ने जिला आयुष अधिकारी से पदस्थ दिनांक से अब तक किए गए निरीक्षणों, मेडिकल स्टोर्स से संबंधित कार्रवाई, फर्जी वैद्यों के विरुद्ध की गई कार्रवाई और दैनिक कार्यवाही का पूरा रिकॉर्ड मांगा था, तो यह जानकारी दो महीने बाद भी क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई?
क्या जिले में फर्जी वैद्यों के खिलाफ वास्तव में कितने निरीक्षण हुए? कितने प्रकरण बनाए गए? कितनों पर कार्रवाई हुई? मेडिकल स्टोर्स के निरीक्षण में क्या-क्या अनियमितताएं मिलीं? कितने मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ी? इन सभी सवालों का जवाब उसी प्रतिवेदन से सामने आना है, जिसे कलेक्टर कार्यालय ने मांगा था।
मामला सिर्फ देरी का नहीं, जवाबदेही का है!
कलेक्टर के आदेश में तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक जानकारी मांगी गई थी, लेकिन दो महीने बाद भी प्रतिवेदन का उपलब्ध न होना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
विशेष रूप से तब, जब शिकायत मेडिकल स्टोर्स और फर्जी वैद्यों जैसे गंभीर विषय से जुड़ी हो और कलेक्टर कार्यालय स्वयं निरीक्षण से लेकर कार्रवाई तक का पूरा रिकॉर्ड मांग रहा हो।
कमिश्नर को भी भेजी गई प्रतिलिपि
10 अगस्त के स्मरण-पत्र की प्रतिलिपि आयुक्त, भोपाल संभाग को भी भेजी गई है। वहीं इसकी एक प्रति शिकायतकर्ता को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
अब देखना यह है कि स्मरण-पत्र के बाद जिला आयुष अधिकारी कब तक कलेक्टर कार्यालय में मांगी गई जानकारी प्रस्तुत करते हैं और पदस्थ दिनांक से अब तक के निरीक्षणों तथा फर्जी वैद्यों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का वास्तविक रिकॉर्ड सामने आता है।
कलेक्टर का तीन दिन में प्रतिवेदन देने का आदेश... दो महीने बाद स्मरण-पत्र! अब सवाल यह है कि आदेश की अनदेखी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?