विजय कुमार दास
समाजवादी चिंतक और खांटी नेता रघु ठाकुर ने कहा है कि वे महाराष्ट्र में टैक्सी-आटो चालकों के लिए संघर्ष करने के लिये तैयार हैं। लोसपा चीफ ठाकुर इस वर्ग के लिए महाराष्ट्र में मराठी की अनिवार्यता 'थोपे' जाने से आहत भी हैं और इसे प्रताड़ना की तरह मान रहे हैं। कल लंबे अर्से बाद पत्रकारों से भी रघु ठाकुर इसी मुददे पर रूबरू हुए। उनका कहना है कि मराठी भाषा की अनिवार्यता व कम समय में इसे सीखने का दबाब बनाना दोयम दर्जे के व्यवहार की तरह है। रघु ठाकुर ने कहा कि भाषा के आधार पर जो महाराष्ट्र में हो रहा है वह नफरत को बढ़ावा देने वाला है। चूंकि महाराष्ट्र में भी भाजपा की सरकार है लिहाजा केंद्र सरकार को इस मामले में दखल देना चाहिये, लेकिन अब तक ऐसा नहीं होना आश्चर्य पैदा कर रहा है। ठाकुर ने कहा कि महाराष्ट्र में मप्र, उप्र, बिहार आदि हिंदी भाषी राज्यों के लोग इस व्यवसाय से जुडे हैं। ऐसे में कुछ ही दिनों में उन पर मराठी भाषा सीखने का दबाव ठीक नहीं हैं। श्री ठाकुर ने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से देश में कई ऐसे उदाहरण हैं जब नेताओं ने अपने मूल राज्य को छोड़कर दूसरे राज्यों से चुनाव लड़ा और जीते यानी जनता ने इन नेताओं को स्वीकार किया, मगर महाराष्ट्र में मराठी को लेकर समय -समय पर उभरने वाला यह दबाव देश की विविधताओं और खूबियों के लिये ठीक नहीं हैं। रघु ठाकुर का कहना है कि अब वे सभी दलों से संपर्क में जुटे हुए हैं कि इस मुद्दे पर एक राय बनाकर आवाज उठायें, खाटी समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे खुद मुंबई जाकर धरना प्रदर्शन के लिये भी तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि 19 अगस्त को ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि ड्राइवरों को पहले नोटिस देकर 3 महीने में मराठी सीखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी मराठी नहीं सीखने पर लाइसेंस और बैज सस्पेंड किया जाएगा। मुंबई में ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने कल से सरकार के मराठी बोलने वाले नियम के विरोध में 3 दिन की हड़ताल बुलाई है। गैर मराठी भाषी ड्राइवरों का कहना है कि इससे उन पर ज्यादा बोझ पड़ेगा। उम्रदराज ड्राइवरों का कहना है कि हमने बिल्कुल पढ़ाई नहीं की है। हमारे सामने परिवार को पालने की चुनौती है। 55-60 साल की उम्र में हम परिवार पालें या नई भाषा सीखें। यह बहुत मुश्किल है।
अब तक ढाई हजार नोटिस:
दरअसल महाराष्ट्र में 20 अगस्त से सरकार ने उन ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है, जिन्हें मराठी नहीं आती है। इसके विरोध में मुंबई में हिंदी बोलने वाले ऑटो ड्राइवरों ने हड़ताल बुलाई है। उधर सरकार ने 20 अगस्त से मराठी न बोलने वाले ड्राइवरों को नोटिस देना शुरू कर दिया है।
जुर्माने के बजाय समय देने की मांग:
ड्राइवरों ने कहा कि कई प्रदर्शनकारी मराठी सीखने और टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें नियम पूरा करने का समय देने के बजाय जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने ने कहा, 'क्या हम 15-20 हजार रुपए का जुर्माना भर सकते हैं? न्याय मिलने तक हम तीन दिन की हड़ताल करेंगे।' भाषा संबंधी इस निर्देश को लेकर परिवहन कर्मचारियों के एक वर्ग में विरोध बढ़ रहा है। चालक अधिकारियों से नियम और इससे जुड़े जुर्माने पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं।
अब तक 2500 नोटिस, 13 हजार ड्राइवरों की जांच:
इस अभियान के तहत मराठी नहीं बोल पाने वाले ड्राइवरों को नोटिस दिए जा रहे हैं। यह अभियान 30 सितंबर तक चलेगा और अब तक करीब 2,500 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। परिवहन विभाग के मुताबिक, 20 अगस्त से मुंबई और राज्य के दूसरे हिस्सों में करीब 13 हजार ड्राइवरों की जांच हुई है। बातचीत की परीक्षा में फेल होने वाले ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक महीने का नोटिस दिया जा रहा है।
(लेखक राष्ट्रीय हिन्दी मेल समाचार पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं)