कृष्णमोहन झा/
इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न ई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने परंपरागत संबोधन में राष्ट्र निर्माण में युवापीढ़ी के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके लिए अनेक लाभकारी घोषणाएं की हैं जिसके पीछे सरकार की एकमात्र मंशा यह है कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को अर्जित करने की दिशा में युवाशक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की सके। इसमें दो राय नहीं हो सकती कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी युवाओं के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से मुफ्त आनलाइन कोचिंग की सुविधा, युवाओं के नये आइडियाज , रिसर्च और स्टार्ट अप्स को बढावा देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के इनोवेशन फंड की स्थापना, अगले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं के लिए आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस के प्रशिक्षण की योजना, 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए की जा रही तैयारियों के अन्तर्गत 5 से 15 साल बच्चों में छिपी प्रतिभा को खोजने के लिए देश व्यापी स्पोर्ट्स हंट अभियान की शुरुआत करने की जो घोषणाएं प्रधानमंत्री ने इस स्वतंत्रता दिवस संबोधन में लाल किले से की हैं उनके माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश के युवा पीढ़ी में यह उम्मीद जगाई है कि सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखेगी। प्रधानमंत्री का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को अर्जित करने के लिए सबसे पहले देश की युवा पीढ़ी को उसके सुनहरे सपने साकार करने हेतु अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए 100 दिनों के नशामुक्ति अभियान का उल्लेख भी किया और युवाओं से देश में चल रही जनगणना प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं की सामर्थ्य को रेखांकित करते हुए कहा कि वे राष्ट्र को नयी ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता के धनी हैं।
स्वतंत्रता दिवस की 79 वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में युवा पीढ़ी के अंदर मौजूद अदभुत सामर्थ्य को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए जिस तरह रेखांकित किया वही भाव नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित किए जा सकते थे। संघ प्रमुख ने कहा कि युवा पीढ़ी हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड ( जनसांख्यिकीय लाभांश) है जो हमें विश्व गुरु बना सकता है लेकिन उसका सदुपयोग होना चाहिए । भागवत ने भारत के युवाओं को अमेरिका, चीन, आस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड से अपनी तुलना न करने की सलाह देते हुए कहा कि हम भारत हैं, हमारी पहचान और विकास का पैमाना दूसरे देशों से अलग है। यह हमारी संस्कृति और गरिमा पर आधारित होना चाहिए। संघ प्रमुख ने कहा कि हम केवल भौतिक उन्नति की बात नहीं करते जबकि बाकी दुनिया सुख सुविधा और पैसे के पीछे दौड रही है। भागवत ने कहा कि जो दुनिया आज अपनी अधूरी दृष्टि के कारण लड़खड़ा रही है उसे सही संतुलन प्रदान कर आगे की राह दिखाने की जिम्मेदारी भारत पर है। उद्यमिता की संस्कृति के सम्मान पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि व्यापार या कोई नये काम में जोखिम होते हैं लेकिन जोखिम उठाने का साहस युवाओं में ही होता है और यही साहस उनकी सफलता के द्वार खोल देता है। भागवत ने कहा कि युवाओं में अनुभव की कमी होती है लेकिन इसी कमी के कारण उनमें खुद को किसी मकसद में झोंक देने का अद्भुत साहस होता है।वे अंधेरे में भी छलांग लगा सकते हैं।उनकी उम्मीदें आसमान से भी ऊंची होती हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वर्तमान युवापीढ़ी की भावनाओं को समझते हुए उसके संवाद कायम करने का सिलसिला शुरू किया है।इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने विगत दिनों नई दिल्ली में आई आई टी के छात्रों के संवाद किया था। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी जेन जी और जेन अल्फा के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम में नयी पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी से अधिक देश भक्त और ईमानदार बताया था। नयी पीढ़ी को समाज का अभिन्न हिस्सा बताते हुए संघ प्रमुख ने तो यहाँ तक कहा था कि अगर किसी पर आंख मूंद कर भरोसा किया जा सकता है तो वह जेन जी है।
(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)