Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

पत्र लेखन दिवस पर 20 साल पुरानी चिट्ठी ने ताजा कर दी पत्रकारिता की यादें..!

 
खबर पढ़कर ‘जल सत्याग्रह’ के प्रभारी प्रदीप व्यास ने पत्रकार दीपक तिवारी को लिखा था पत्र, आज भी संभालकर रखी है वह चिट्ठी
विदिशा। आज जब पत्र लिखने की परंपरा लगभग इतिहास बनती जा रही है और संवाद का माध्यम मोबाइल मैसेज व सोशल मीडिया बन गया है, ऐसे समय में करीब 20 साल पुराना एक हस्तलिखित पत्र पत्रकारिता के उस दौर की याद दिलाता है, जब किसी खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए लोग बाकायदा पत्र लिखा करते थे।
यह पत्र 18 अप्रैल 2006 को दैनिक भास्कर के ‘जल सत्याग्रह’ अभियान के प्रभारी श्री प्रदीप व्यास ने पत्रकार दीपक तिवारी को लिखा था। पत्र में उन्होंने विदिशा की ऐतिहासिक जल संरचनाओं और जल संरक्षण से जुड़ी खबर के लिए दीपक तिवारी की सराहना करते हुए पानी बचाने के अभियान को आगे बढ़ाने की बात कही थी।
दरअसल, इससे दो दिन पहले प्रकाशित खबर में “बीजामंडल की बावड़ी बुझा सकती है विदिशा की प्यास” शीर्षक से शहर की प्राचीन बावड़ी और उसके संरक्षण की जरूरत को प्रमुखता से उठाया गया था। खबर में बताया गया था कि देखरेख के अभाव में कभी भरपूर जलराशि वाली यह ऐतिहासिक बावड़ी उपेक्षा का शिकार हो रही है।

खबर ने जगाई थी जल संरक्षण की चिंता

श्री प्रदीप व्यास ने अपने पत्र में पानी की गंभीर समस्या, जल स्रोतों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाने की आवश्यकता पर विस्तार से लिखा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पुराने जलस्रोतों का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पत्र के शब्दों में उस दौर की पत्रकारिता की एक खास झलक भी दिखाई देती है—जहां खबर केवल सूचना देने का माध्यम नहीं थी, बल्कि समाज और प्रशासन को जागरूक करने का जरिया भी हुआ करती थी।
दो दशक बाद भी सुरक्षित है चिट्ठी
करीब दो दशक बाद भी यह पत्र सुरक्षित है। पत्र लेखन दिवस पर सामने आई यह चिट्ठी उस दौर की याद दिलाती है, जब एक अच्छी खबर पर पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता या अभियान से जुड़े लोग पत्रकार को अपनी प्रतिक्रिया कागज पर कलम से लिखकर भेजते थे।
पत्रकार दीपक तिवारी का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में ऐसे पत्र किसी धरोहर से कम नहीं हैं। एक खबर पर मिली यह चिट्ठी उनके लिए सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस दौर की पत्रकारिता और समाज के बीच बने जीवंत संवाद की याद है।
20 साल पुरानी यह चिट्ठी आज भी यही संदेश देती है—अच्छी पत्रकारिता खबर के प्रकाशित होने के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि वह समाज में सवाल, संवाद और बदलाव की शुरुआत करती है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |