Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

भगवान भरोसे विदिशा जिले के मरीज? सालों से कागजों में चल रहा आयुष विभाग..!


न आयुष औषधियों की सूची, न निजी औषधालयों की जानकारी, न निरीक्षण रिपोर्ट! RTI के जवाब ने खड़े किए गंभीर सवाल?

एमपी धमाका 
विदिशा। जिले में आयुष चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक आरटीआई जवाब ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीआई के माध्यम से जिले में संचालित आयुर्वेदिक औषधि निर्माण शालाओं, उनके निरीक्षण तथा कर्मचारियों एवं चिकित्सा अधिकारियों से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन जिला आयुष कार्यालय के जवाब में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
जिला आयुष अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक विविअ/2025/2277 में आरटीआई आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी के संबंध में जवाब दिया गया है।

औषधियों की सत्यापित सूची मांगी तो कहा—विशिष्टियां स्पष्ट नहीं

आरटीआई में जिले में स्थित आयुर्वेदिक औषधि निर्माण शालाओं में बनने वाली औषधियों की सत्यापित सूची मांगी गई थी। इसके जवाब में विभाग ने कहा कि मांगी गई जानकारी की विशिष्टियां स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए जानकारी देना संभव नहीं है।

2016 से निरीक्षण रिपोर्ट मांगी, विभाग ने कहा—रिपोर्ट संधारित नहीं

आरटीआई में 1 जनवरी 2016 से आवेदन निराकरण होने तक औषधि निर्माण शालाओं के जिला आयुष अधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण की सत्यापित प्रतियां भी मांगी गई थीं। विभाग का जवाब है कि औषधि निर्माण शालाओं के निरीक्षण की रिपोर्ट संधारित नहीं की जाती, बल्कि अनुज्ञा नवीनीकरण के समय संबंधित प्रतिवेदन अनुज्ञापन प्राधिकारी एवं कार्यालय औषधि नियंत्रक, संचालनालय आयुष, मध्यप्रदेश भोपाल को भेजे जाते हैं।

30-31 जुलाई 2025 के आवेदनों की जानकारी भी नहीं

आरटीआई में 30 एवं 31 जुलाई 2025 को कर्मचारियों एवं चिकित्सा अधिकारियों द्वारा लिए गए अवकाश के आवेदनों की सत्यापित प्रतियां भी मांगी गई थीं। इस बिंदु पर भी विभाग ने कहा कि मांगी गई जानकारी की विशिष्टियां स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए जानकारी देना संभव नहीं है।
सवाल यह कि आखिर विभाग के पास रिकॉर्ड कितना व्यवस्थित है?
आरटीआई के इस जवाब के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिले में आयुष व्यवस्था की निगरानी, औषधि निर्माण इकाइयों के निरीक्षण और संबंधित रिकॉर्ड के रखरखाव की वास्तविक स्थिति क्या है?
यदि निरीक्षण रिपोर्ट जिला कार्यालय में संधारित नहीं होती, औषधियों की सूची स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने में विभाग असमर्थता जताता है और कर्मचारियों-अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड के लिए भी जानकारी की विशिष्टियां स्पष्ट न होने का हवाला दिया जाता है, तो आम मरीजों को आयुष व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आरटीआई से सामने आया यह जवाब अब सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि विदिशा जिले की आयुष व्यवस्था में रिकॉर्ड प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर बहस का विषय बन गया है।
बड़ा सवाल
आयुष विभाग के पास जिले में संचालित औषधि निर्माण इकाइयों, उनके निरीक्षण और संबंधित व्यवस्थाओं का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं है? मरीज भगवान भरोसे हैं?

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |