चिकित्सा विहीन आयुष औषधालयों में डॉक्टर की ड्यूटी लगाने के आदेश पर जांच की मांग, जिला पंचायत अध्यक्ष ने सीईओ को लिखा था पत्र
एमपी धमाका
विदिशा। जिले में चिकित्सा व्यवस्था और आयुष विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला पंचायत विदिशा की अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत विदिशा को लिखे गए पत्र के बावजूद मामले में जांच और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का आरोप है। खास बात यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है।
दस्तावेज के अनुसार, जिला पंचायत अध्यक्ष ने 9 फरवरी 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत विदिशा को पत्र क्रमांक 75/26 लिखकर “चिकित्सा विहीन औषधालयों में चिकित्सा की ड्यूटी लगाने के संबंध में” जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का अनुरोध किया था।
पत्र में जिला आयुष अधिकारी, जिला विदिशा के 21 जनवरी 2026 के आदेश क्रमांक 242-47 का हवाला देते हुए बताया गया कि चिकित्सा विहीन औषधालयों में एक ब्लॉक के डॉक्टर की ड्यूटी दूसरे ब्लॉक में महीने में एक बार लगाए जाने की व्यवस्था की गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने इस व्यवस्था को लेकर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का अनुरोध किया था।
पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर विदिशा को भी भेजी गई थी। बावजूद इसके, आरोप है कि अध्यक्ष के पत्र पर अपेक्षित जांच नहीं हुई और मामला कचरे की टोकरी में फेंके जाने जैसा नजर आ रहा है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
यदि चिकित्सा विहीन औषधालयों में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने के आदेश दिए गए हैं, तो इसकी व्यवहारिकता, डॉक्टरों की उपलब्धता, मरीजों को मिलने वाली सुविधा और आदेश के पालन की स्थिति की जांच होना जरूरी है। जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा स्वयं इस संबंध में जांच की मांग किए जाने के बाद भी यदि जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
अब सवाल यह है कि राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त जिला पंचायत अध्यक्ष के पत्र पर आखिर जांच क्यों नहीं हुई? संबंधित अधिकारियों ने इस मामले में क्या कार्रवाई की? क्या जिला आयुष अधिकारी के आदेश की समीक्षा हुई? और यदि जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
अब जवाबदेही तय करने की मांग
मामले में जिला प्रशासन और जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्ट स्थिति सामने रखने की मांग उठ रही है। साथ ही यह भी सवाल है कि जब जनप्रतिनिधि द्वारा लिखित रूप से किसी प्रशासनिक व्यवस्था की जांच की मांग की जाती है, तो उस पत्र को लंबित रखने के पीछे आखिर क्या वजह है?
दस्तावेज अब सवाल पूछ रहा है—पत्र गया कहां, जांच हुई कहां और कार्रवाई हुई कहां?