‘लोकगीत सम्राट’ हरगोविंद विश्व का एमपी धमाका ने किया सम्मान
बुंदेली लोकगीत, साहित्य और संस्कृति पर संपादक दीपक तिवारी ने की खास बातचीत
सागर। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगीत और साहित्य को अपनी आवाज एवं लेखनी से नई पहचान दिलाने वाले प्रसिद्ध लोकगीत गायक एवं साहित्यकार ‘लोकगीत सम्राट’ एवं ‘बुंदेली रत्न’ श्री हरगोविंद विश्व का **एमपी धमाका** की ओर से सम्मान किया गया। सागर में आयोजित इस विशेष मुलाकात के दौरान **एमपी धमाका के संपादक दीपक तिवारी** ने श्री विश्व से उनके दीर्घ संगीत सफर, बुंदेली लोकगीतों, साहित्य, संस्कृति और बदलते दौर से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
श्री हरगोविंद विश्व ने अपने जीवन का लंबा समय बुंदेलखंड की लोक परंपराओं और लोकगीतों को समर्पित किया है। उनकी गायकी में बुंदेली मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की संवेदनाएं और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। उनके योगदान के लिए उन्हें **‘लोकगीत सम्राट’** और **‘बुंदेली रत्न’** जैसे सम्मानजनक संबोधनों से जाना जाता है।
इस खास बातचीत में बुंदेली लोकगीतों की वर्तमान स्थिति, बदलते सामाजिक परिवेश में लोक संस्कृति की भूमिका, नई पीढ़ी का लोक संगीत से जुड़ाव तथा बुंदेली साहित्य एवं परंपराओं के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
94 की उम्र, लेकिन सुरों में आज भी वही जुनून
श्री हरगोविंद विश्व की सबसे प्रेरणादायी बात यह है कि 94 वर्ष की उम्र पूरी होने के बावजूद उन्होंने आज तक गाना नहीं छोड़ा। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका सुरों के प्रति समर्पण और लोकगीतों के प्रति जुनून बरकरार है। उनका यह निरंतर सफर बताता है कि कला के प्रति सच्ची साधना उम्र की मोहताज नहीं होती।
एमपी धमाका के संपादक **दीपक तिवारी** ने कहा कि श्री हरगोविंद विश्व जैसे कलाकार बुंदेलखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीवन और कला के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे लोक कलाकारों का सम्मान वास्तव में हमारी लोक संस्कृति और परंपराओं का सम्मान है।
लोकगीतों की यह विरासत केवल गीत नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की मिट्टी, संस्कृति और जीवन का जीवंत दस्तावेज है।श्री हरगोविंद विश्व आज भी अपनी आवाज के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।