प्रमुख सचिव और आयुक्त आयुष के दौरे की जिला प्रशासन को भनक तक नहीं, मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के निरीक्षण पर उठे सवाल
विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा में आयुष विभाग की कार्यप्रणाली और विभागीय समन्वय को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत आयुष विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने विदिशा का दौरा किया, निरीक्षण किए और लौट गए, लेकिन जिला प्रशासन को इन दौरों की पूर्व सूचना तक नहीं दी गई। सवाल यह है कि जब जिले में शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं, तो जिला प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं होती?
दो वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे, प्रशासन को सूचना नहीं
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन के आयुष विभाग की आयुक्त श्रीमती उमा आर. माहेश्वरी ने 21 अगस्त 2026 को तथा प्रमुख सचिव, आयुष विभाग, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल शोभित जैन ने 11 सितंबर 2026 को विदिशा का दौरा किया। दोनों दौरे मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत निर्धारित बताए गए हैं।
इस दौरान जिला मुख्यालय स्थित आयुष विंग के साथ-साथ जिले के ग्राम खमतला और खामखेड़ा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण हुआ, लेकिन समन्वय कहां गया?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जिला प्रशासन को सूचना दिए जाने से जुड़ा है। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के जिला दौरों में संबंधित जिला प्रशासन से समन्वय, आवश्यक व्यवस्थाओं और सुरक्षा प्रबंधों की भूमिका रहती है। ऐसे में यदि दो अलग-अलग मौकों पर वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे की पूर्व सूचना जिला प्रशासन तक नहीं पहुंची, तो यह विभागीय समन्वय की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
लगभग तीन सप्ताह के अंतराल में हुई इन दोनों यात्राओं में एक जैसी स्थिति सामने आने से यह जानना जरूरी हो जाता है कि सूचना किस स्तर पर रोकी गई, किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी और जिला प्रशासन को अवगत क्यों नहीं कराया गया?
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की भावना पर भी सवाल
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाना है। ऐसे में अभियान के तहत होने वाले निरीक्षणों में ही यदि विभागों के बीच आवश्यक समन्वय का अभाव दिखाई दे, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।
यह मामला केवल सूचना नहीं दिए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आयुष विभाग की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग, अधिकारियों के बीच तालमेल और निरीक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी चर्चा जरूरी हो गई है।
जिम्मेदारों से जवाब अपेक्षित
आखिर वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे की जानकारी जिला प्रशासन को क्यों नहीं दी गई? क्या यह विभागीय स्तर की चूक थी या जानबूझकर समन्वय से दूरी बनाई गई? क्या निरीक्षण के दौरान सामने आए बिंदुओं पर जिला प्रशासन को कोई रिपोर्ट या निर्देश दिए गए?
इन सवालों का जवाब आयुष विभाग और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षित है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत होने वाले निरीक्षणों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब निरीक्षण के साथ जवाबदेही, समन्वय और पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो।
एमपी धमाका की पड़ताल जारी है।