बिना नीलामी शासकीय वाहन काटे जाने का दावा, 40 गाड़ियों पर करीब 20 लाख में सौदा होने की चर्चा; जांच की मांग
विदिशा। नगर पालिका परिषद विदिशा के परिसर में खड़ी पुरानी शासकीय गाड़ियों को काटकर कबाड़ में बेचे जाने के आरोप ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद आशीष माहेश्वरी ने आरोप लगाया है कि कचरा वाहन, टैंकर, ट्रैक्टर, फायर ब्रिगेड, ट्रॉली, जेसीबी सहित अन्य पुराने वाहनों को निर्धारित नीलामी प्रक्रिया के बिना ही काटकर कबाड़ के रूप में हटाया जा रहा है।
माहेश्वरी ने कहा कि यदि शासकीय वाहन कंडम घोषित किए गए हैं तो इसके लिए विधिवत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि परिषद को यह जानकारी तक नहीं दी गई कि कौन-सा वाहन कंडम घोषित हुआ, किस अधिकारी ने उसे कंडम घोषित किया और उसकी नीलामी किस प्रक्रिया के तहत की गई।
कहां गया कबाड़ का पैसा?
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि वाहनों से निकलने वाले कबाड़ की बिक्री से प्राप्त राशि नगर पालिका के खाते में जमा हुई या नहीं, इसका भी स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया में नगर पालिका को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी मांग की कि प्रत्येक वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, वाहन की उम्र, कंडम घोषित किए जाने का प्रमाण, मूल्यांकन रिपोर्ट और नीलामी संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
40 गाड़ियों को लेकर भी उठाए सवाल
आशीष माहेश्वरी ने दावा किया कि करीब 40 वाहन नगर पालिका से हटाए गए हैं और इनके लगभग 20 लाख रुपये में दिए जाने की चर्चा है, जबकि उनका दावा है कि इनकी वास्तविक कीमत करीब 80 लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। हालांकि इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दो दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पिछले 15 दिनों में तोड़ी या हटाई गई सभी गाड़ियों की सूची और उनके नीलामी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही बिना वैधानिक प्रक्रिया वाहन काटे जाने की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित कबाड़ी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
माहेश्वरी ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन के भीतर कथित अवैध कटान बंद नहीं हुआ और रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए गए, तो वे वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा कर आंदोलन करेंगे।
अब सवाल यह है कि नगर पालिका परिसर में खड़ी शासकीय गाड़ियों को हटाने और कबाड़ में बेचने के पीछे वास्तविक प्रक्रिया क्या अपनाई गई? इसका जवाब दस्तावेज सामने आने और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।