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अंग्रेजों की कलेक्ट्रेट और घुड़साल के निशान आज भी जिंदा


पुरानी कलेक्ट्रेट के पास मौजूद ऐतिहासिक इमारतें विदिशा के औपनिवेशिक दौर की यादें समेटे हुए

विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा शहर की ऐतिहासिक विरासत केवल मंदिरों, पुरातात्विक स्थलों और पुराने भवनों तक सीमित नहीं है। शहर के पुराने कलेक्ट्रेट के आसपास आज भी ऐसी इमारतें मौजूद हैं, जो अंग्रेजों के शासनकाल की प्रशासनिक व्यवस्था और उस दौर की जीवनशैली की याद दिलाती हैं।
पुरानी कलेक्ट्रेट के समीप स्थित इन जर्जर लेकिन ऐतिहासिक भवनों को स्थानीय स्तर पर अंग्रेजों की कलेक्ट्रेट और घुड़साल के रूप में जाना जाता है। समय के थपेड़ों के बावजूद इनकी पुरानी दीवारें आज भी अपने अतीत की कहानी बयां करती नजर आती हैं।

जहां कभी होती थी घोड़ों की आवाजाही

स्थानीय जानकारी के अनुसार, अंग्रेजों के समय इस परिसर का उपयोग प्रशासनिक गतिविधियों के साथ घोड़ों से संबंधित व्यवस्था के लिए भी किया जाता था। उस दौर में अधिकारियों और प्रशासनिक अमले की आवाजाही में घोड़ों का महत्वपूर्ण स्थान था। यही वजह है कि परिसर में घुड़साल से जुड़ी संरचनाएं भी बनाई गई थीं।
बाद के वर्षों में इन भवनों का उपयोग अलग-अलग शासकीय कार्यों के लिए होता रहा। बताया जाता है कि इसी परिसर की एक इमारत में कलेक्ट्रेट का पोस्ट ऑफिस भी संचालित होता था।

आज भी कर्मचारियों के आवास

समय के साथ भवनों का स्वरूप बदला, लेकिन परिसर पूरी तरह इतिहास का हिस्सा नहीं बना। आज भी यहां कुछ हिस्सों में शासकीय कर्मचारियों के आवास बताए जाते हैं। पुरानी दीवारों पर उगी काई, टूटती संरचनाएं और आसपास मौजूद पुराने पेड़ इस स्थान को एक अलग ही ऐतिहासिक पहचान देते हैं।

संरक्षण की जरूरत

विदिशा अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत के लिए देशभर में जाना जाता है। ऐसे में शहर के भीतर मौजूद औपनिवेशिक काल की इन संरचनाओं का भी दस्तावेजीकरण और संरक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि इन भवनों का व्यवस्थित सर्वे कराया जाए और इनके इतिहास को प्रमाणिक दस्तावेजों के साथ सामने लाया जाए, तो यह विदिशा के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय नई पीढ़ी तक पहुंच सकता है।
पुरानी दीवारें भले खामोश हैं, लेकिन उनके भीतर विदिशा के बदलते प्रशासन और बीते दौर की कई कहानियां आज भी दफन हैं।

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